यह कौंसलिंग क्या है?: डॉ. स्वतन्त्र जैन - Arth Parkash
Tuesday, February 19, 2019
Breaking News
Home » संपादकीय » यह कौंसलिंग क्या है?: डॉ. स्वतन्त्र जैन
यह कौंसलिंग क्या है?: डॉ. स्वतन्त्र जैन

यह कौंसलिंग क्या है?: डॉ. स्वतन्त्र जैन

दोस्तों, कॉंसलिंग को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम हैं। पढ़े-लिखे सभ्य लोग भी कॉंसलिंग को नहीं समझते। उच्च से उच्चतर शिक्षित लोग भी प्राय: पूछते हैं, ‘कॉंसलिंग क्या और किस के लिये होती है और कैसे होती है? इससे क्या फायदा है? या फिर ये सुनने को मिलता है कि ‘हम कोई पागल थोड़े हैं जो थैरेपिस्ट के पास जाएं।

किसी को यदि कोई अपनी समस्याओं के बारे किसी प्रशिक्षित कॉन्सलर या थैरेपिस्ट के पास जाने की सलाह दें तो उन्हें यह नहीं लगना चाहिये कि लोग उन्हें पागल या मानसिक रोगी समझ लेंगे। परंतु ज्यादातर लोगों को यह एक स्टिग्मा या अपने जीवन पर बड़े धब्बे जैसा लगता है। जबकि सच्चाई यह है कि जैसे शरीर के किसी भी हिस्से में कहीं कोइ्र्र दु:ख-दर्द हो और घरेलु नुस्खे करने के बावजूद कम ना हो, तो हम किसी अच्छे विशेषज्ञ के पास जाते हैं। ठीक ऐसे ही हम सभी किसी ना किसी समस्या, उलझन या तनाव को लेकर परेशान हों, चाहे वह परेशानी हमारे खुद या हमारे अपनों और बहुत अपनों से क्यों ना संबंधित हो या जब हमारी भावनाओं, उलझनों व समस्याओं का हम या हमारे अपने स्वयं हल नहीं निकाल पाते, उसके लिये हम किसी प्रशिक्षित, अनुभवी व विश्वसनीय कॉंसलिंग थैरेपिस्ट की मदद से निज़ात पा सकें तो कैसा संकोच और क्योंकर? हां यह अलग बात है कि कुछ मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को अवश्य मानसिक रोगियों के हस्पताल ले जाना चाहिये।

जानते हों, ‘कमल’ की तरह कॉन्सलिंग भी हमें जिंदगी की समस्याओं रूपी कीचड़ से बाहर रखती है और एक ‘छाते’ की तरह हमारे जीवन की धूप-छॉंव और दु:ख-दर्द की बारिश से रक्षा करती है। टूटते संयुक्त परिवार और जि़ंदगी की भाग-दौड़ में हम सब पर इतना दबाव बढ़ गया है कि हम अपनी समस्याओं से बौखला जाते हैं, हमें किसी ना किसी की सहायता की ज़रूरत होती है। जि़ंदगी के हर मोड़ पर हम किसी ना किसी समस्या/उलझन से घिरे होते हैं जिनका समाधन हो सकता है, पर हम उसे नजऱान्दाज़ करके अपने जीवन का नासूर बना लेते हैं। तो आइये देखें कि कैसी-कैसी समस्याओं में कॉन्सलिंग थैरेपी आपको, बच्चों, किशोरों और युवाओं को मदद कर सकती है?

जब आपका आत्म-विश्वास डगमगा रहा हो, जब स्वाभिमान छलनी होता दिखे, जब आप अपनी बात या राय आसानी से कह ना पाएं, जब दुविधा में फंसे हों और कोई निर्णय नहीं ले पाएं, जब मन बहुत उद्वेलित हों, जब अत्याध्कि तनाव, दबाव या निराशा से जूझ रहे हों, जब जीवन-मूल्यों के संकट से गुजऱ रहे हो, जब अपने प्रियजन के बिछोह से उभर ना पा रहे हों, जब आपको कोई किसी भी तरह सता रहा हो, जब अपने काम, क्रोध, मोह, ईष्र्या, घृणा, आत्म-ग्लानि या ऐसी ही नकारात्मक भावों से जूझ रहे हों, जब आत्मघाती विचारों से पीछा ना छुड़ा पा रहे हों, जब आपका किसी भी तरह भावनात्मक, शारीरिक या यौण शोषण हुआ या हो रहा हो – तो दोस्तों, जाना चाहिये आपको किसी अच्छे कॉन्सलर के पास, विशेषकर तब, जब आप या आपके अपने घिरे हों..

पर्सनल समस्याओं के लिये : जब खुद को ना समझ पा रहे हों, जब खुद की इमेज से परेशान हों, जब अपनी रुचि, अपने निहित गुण-दोष, अपने जीवन-मूल्यों का पता ना हो, जब अपनी पसंद-नापसंद का पता ना हो, जब खुद की अभिलाषा व मंजिल का पता ना हो, जब अपने संकोची स्वभाव से जूझ रहे हो, जब अपने अंदर के काम-क्रोध, क्षोभ, भय, चिंता, लोभ-मोह, ईष्र्या-द्वेष, निराशा व पूर्वाग्रह जैसे तनावों से घिरे हों, जब मरने-मारने या आत्म-हत्या के विचार हावी हो रहे हों…

किशोरावस्था के तनाव एवं उलझनों में : जब आप किशोरावस्था की दहलीज पर हों और मानसिक व भावनात्मक परिवर्तनों को समझ ना पा रहे हों या आपको लगता हो कि आपके पेरेंटस, टीचर्स व समाज के लोग आपको नहीं समझते या आप अपने अंदर होने वाले अक्समात शारीरिक परिवर्तनों से जूझ ना पा रहे हों, मात-पिता से आपके संबंध् अचानक से बिगडने की कगार पर हो, कोई पारिवारिक समस्या से घिरे हों, या कोई आपके हम-उम्र साथी या कोई अन्य आपकों सताने की हद तक परेशान कर रहा हो..

पढ़ाई संबंधित समस्याओं में : जब आपको समझ ना आ रहा हो कि आप क्या विषय लें या ना लें, कैसे याद करें, कैसे अपना समय-प्रबंधन करें, अत्याधिक चिंता से कैसे निज़ात पाएं, जब कोई किसी भी प्रकार के ताल-मेल या सामंजस्य की-

किसी भावनात्मक समस्या से जूझने पर : जब आपको लगे कि परिस्थितियां आपके वश में नहीं रही या उसको ख़ुद समझ नहीं पाते या उसके सभी पहलुओं को देखने-परखने में नाकाम हो, उससे जूझ नहीं पाते तो अपनी समस्या ज्यादा बढ़ाने के बजाए किसी अच्छे थेरेपिस्ट से सलाह ले सकते हैं।

बहुत उत्तेजित, व्यथित या अशान्त हों : कॉंसलिंग से हम अपने मन और उसमें उठते विचारों को शांत करना सीख सकते हें। क्योंकि मन के शांत होने पर ही हम चीजों को पहले के मुकाबले ज्यादा साफ-स्पष्ट देख सकते हैं और ज्यादा अच्छी तरह निर्णय ले सकते हैं।

जीवन में कोई बहुत बड़े बदलाव से संभल ना पाएं : जैसे विवाह होना, नई जॉब लगना या जॉब छूटना, नया शहर या घर बदलना, बच्चे का पैदा होना या किसी से अचानक गहरी मित्राता छूटना या नई मित्राता होना। ऐसी सभी बदलाव वाली परिस्थितियों का सामना करने और उसकी चुनौतियों से निपटने के लिये कॉंस्लिग थैरेपी बहुत मदद कर सकती है।

संबंधों में तनाव या बिखऱाव आने पर : अक्सर जीवन में पति-पत्नी, भाई-बहिन, पिता-पुत्र, सास-बहु, मॉ-बेटी या ननद-भावज जैसे बहुत से महत्वपूर्ण परिवारिक या दोस्ताना व व्यवसायिक संबंधों में तनाव और खटास पैदा होती रहती है। जितना हम उसमें से निकलने की कोशिश करते हैं उतना ही उसमें और ज्यादा घिरते जाते हैं क्योकि हम खुद निष्पक्षता से सारे पक्षों को देख नहीं पाते। ऐसे में कॉंसलिंग से बहुत ज्यादा और बहुत जल्द फायदा हो सकता है क्योंकि वह दोनों पक्षों को बिना किसी टिप्पणी के निष्पक्षता से सुनकर, समझने-समझाने और दोनों को एक-दूसरे का नज़रिया समझने मे मदद कर उनके आपसी विवाद को समाप्त करने में सक्षम है।

पेरेंटस के लिये पेरेंटिंग स्किल्स : अपने बच्चों की परवरिश कैसे करें कि वे परिवार, समाज और देश के लिये अच्छे नागरिक बन सकें, कौन सा पेरेंटिंग स्टाईल सही है, उन्हें कब कैसे और कितने अनुशासन और नियं़त्रण में रखें, कितनी और कैसी सजा दें; पढ़ाई के लिये कैसे प्रेरित करें, उनके जीवन-मूल्यों के बनाने में कैसे योगदान करें, गलत मूल्यों को कैसे बदलें, गलत मित्रता को कैसे बदलें, उन्हे यौण शिक्षा कब और कैसे दें…

आत्मघाती विचारों से घिरने पर : घोर असफलता, अत्याधिक निराशा, दबाव व तनाव की स्थिति में आत्मधाती विचारों से घिरने पर कॉंसलर आपको दयनीय और तनावपूर्ण स्थिति से बाहर निकालने में काफी हद तक राहत दिला सकते है।

अकेला, लाचार, बेबस या आहत महसूस करने पर : जब कभी आप ऐसी बेबसी महसूस कर रहे हो कि आप अपना दु:ख-दर्द किसी से सांझा नहीं कर सकते तो वह कॉंसलर ही है जिससे आप अपनी दुविध, दु:ख-दर्द सांझा कर सकते हैं।

विवाह से पहले अपने लिये साथी कैसे, किस आधर पर चुने और कैसे अपने वैवाहिक जीवन को सफल बनाएं….

विवाहित लोगों के लिये : जब पति-पत्नि एक-दूसरे को समझ ना पा रहे हों, उनके संबंधों मे खटास, दरार या तनाव पैदा हो जाए, जब तलाक या संबंघ विच्छेद की तलवार लटकी हो।

किसी अति-आघातपूर्ण हालात या सदमे से गुजऱ रहे हों : जैसे किसी की अक्समात मौत, शारीरिक-मानसिक आघात, आर्थिक तौर पर बरबादी का सदमा, दुर्घटनाा से किसी अंग विशेष के कट जाने या खऱाब होने के सदमे की हालत में कॉंसलिंग कारगर है।

रिटायरमेंट व ढलती उम्र में बुढ़ापे की समस्याओं से जूझने पर : अकेलापन, खुद का महत्व कम होने से नैराश्य-भाव बढऩे या खुदकी गतिशीलता की कमी से दूसरों पर निर्भरता के बढऩे या स्वास्थय संबंधित समस्याएं व महत्वपुर्ण ज्ञानेन्द्रियों के शिथिल पडऩे से संबंधित समस्याओं के लिये, जीवन-साथी के बिछुडऩे के बाद एकाकीपन की भावना से उभरने के लिये, और नशे या अन्य किसी बुरी आदत से बाहर निकलने के लिये कॉंसलिंग बहुत फायदेमंद हो सकती है।

उपरोक्त सभी समस्याओं का समाधन आपको कॉंसलिंग के निष्पक्ष, विश्वसनीय, शांत और सुरक्षित माहौल में ही मिल सकता है। परंतु यह ध्यान रहे कि किसी भी कॉन्सलर के पास किसी भी समस्या का कोई पूर्व-निर्धारित फॉरमूला या कोई टॉनिक नहीं होता। ना ही वह आपको कुछ खास करने के लिये विशेष सलाह या निर्देश ही देगा। वह तो आपकी समस्या के हर पहलू को दोबारा से आपके द्वारा ही आपके सामने रखकर आपको उसे नए नज़रिये से देखने के लिये प्रेरित करता है, जिस की वजह से आप उन छोड़े हुए बिंदुओं को नई दृष्टि से देखने, समझने व जोडऩे का सामथ्र्य प्राप्त कर अपने रिश्तों व समस्याओं को एक औेर सकारात्मक अवसर प्रदान कर सकते हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share