लखनऊ में जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल ने शुरू की सुनवाई, व्यापारियों को मिलेगा समय पर न्याय

1000262842

GST Appellate Tribunal begins hearings in Lucknow

लखनऊ। GST Appellate Tribunal begins hearings in Lucknow, वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) संबंधी विवादों को लेकर व्यापारियों द्वारा की गई अपील पर वस्तु एवं सेवाकर अपीलेट ट्रिब्यूनल(जीएसटीएटी) ने बुधवार से सुनवाई शुरू कर दी।

पहले दिन छह अपील पर सुनवाई हुई। अब नियमित सुनवाई से लखनऊ परिक्षेत्र के व्यापारियों को समय से न्याय मिलने की संभावना बढ़ गयी है। ट्रिब्यूनल के समक्ष लखनऊ परिक्षेत्र के 1500 व्यापारियों ने अपील दाखिल कर रखी है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, वाराणसी और गाजियाबाद में अपीलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना की है। ट्रिब्यूनल जीएसटी अधिकारियों के निर्णयों के खिलाफ व्यापारियों आदि की प्रथम अपील सुनेगा।

लखनऊ के न्यायाधिकरण के लिए संतोष कुमार श्रीवास्तव, नरेन्द्र कुमार को न्यायिक सदस्य तथा आलोक चोपड़ा को सदस्य तकनीकी (सेंट्रल) और अरविंद कुमार को तकनीकी सदस्य (राज्य) नियुक्त किया गया है।

गोमतीनगगर के विभूति खंड स्थित अप्रत्यक्षकर भवन के बी ब्लाक की चौथी मंजिल पर ट्रिब्यूनल के लिए कोर्ट रूम बनाए गए हैं। बुधवार को न्यायिक और तकनीकी सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलन के बाद कोर्ट रूम में सुनवाई का शुभारम्भ किया।

सदस्यों ने कहा गया कि व्यापारियों की अपील का तेजी से निस्तारण किया जाएगा ताकि उन्हें समय से न्याय मिल सके। इस अवसर पर यूपीजीएसटीएटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुमार सौरभ, सचिव नमन तिवारी, आइसीएआइ के उपाध्यक्ष रिषभ मिश्र समेत बड़ी संख्या में व्यापारी भी मौजूद रहे।

लखनऊ परिक्षेत्र के तहत लखनऊ के अलावा हरदोई, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुरखीरी, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, बरेली, बदायूं, शहाजहांपुर, पीलीभीत, अयोध्या, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती के व्यापारी जीएसटी अधिकारियों के निर्णय के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं।

ट्रिब्यूनल के निर्णय से संतुष्ट न होने पर व्यापारी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकेंगे। ट्रिब्यूनल द्वारा अपील सुनने से हाईकोर्ट में जीएसटी से संबंधित मुकदमों का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यूनल के न होने पर जीएसटी अधिकारियों के निर्णय के विरुद्ध व्यापारियों को सीधे हाईकोर्ट जाना पड़ता था।