पंचायतों के बजट आवंटन पर ओम प्रकाश राजभर की बड़ी मांग, केंद्रीय वित्त आयोग की व्यवस्था में बदलाव का रखा प्रस्ताव

Om Prakash Rajbhar makes a major demand

Om Prakash Rajbhar makes a major demand

लखनऊ। Om Prakash Rajbhar makes a major demand, पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने केंद्रीय वित्त आयोगों द्वारा एक बार में अगले पांच वर्ष की धनराशि (बजट) आवंटन की व्यवस्था की जगह प्रदेश राज्य वित्त आयोग की तरह प्रत्येक वर्ष बजट के के समय करों में हिस्सेदारी के हिसाब से बजट आवंटन की व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की है।

कहा है कि एक ही बार में पांच वर्ष का बजट आवंटन होने से केंद्रीय करों का संग्रह अधिक होने के बाद भी राज्य की पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग से राज्य वित्त आयोग की तुलना में कम धनराशि मिल रही है।

शुक्रवार को नई दिल्ली में 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की कार्यशाला में राजभर ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोगों द्वारा रिपोर्ट में एक बार में अगले पांच वर्ष की धनराशि का आवंटन कर दिया जाता है, जबकि यह केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में प्रत्येक वर्ष होना चाहिए। वर्तमान वित्तीय वर्ष में पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से 14,997 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि 16वें वित्त आयोग से 10,675 करोड़ रुपये का आवंटन है।

उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की गाइड लाइन में पंचायतों के लिए तकनीकी व प्रशासनिक मद में धनराशि की व्यवस्था नहीं है जबकि पहले 10 प्रतिशत की व्यवस्था थी। ऐसे में पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायक व सामुदायिक शौचालयोंं के केयर टेकर को मानदेय देने में दिक्कत हो रही है।

उन्होंने प्रदेश की 57,694 पंचायतों (देशभर की पंचायतों का 22 प्रतिशत) के विकास के लिए परफार्मेंस ग्रांट की शर्तों को व्यावहारिक बनाने का अनुरोध किया। पात्रता शर्तों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जहां शहरी क्षेत्रों व जिला पंचायतों के लिए केवल 'स्वयं के संसाधन से आय वृद्धि' की शर्त है, वहीं ग्राम पंचायतों के लिए 1200 रुपये प्रति व्यक्ति न्यूनतम आय का मापदंड है।

यूपी में यह शर्त अव्यवहारिक है, क्योंकि यहां कम आबादी पर पंचायतें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 14वें वित्त आयोग की परफार्मेंस ग्रांट में अनियमितताओं के कारण 67 ग्राम पंचायतों की धनराशि जांच व कड़े प्रतिबंधों के कारण लंबित है। ऐसे में अन्य सभी का अनुदान रोकना अतार्किक है।