किन्नौर में तेज बारिश से बाढ़ और मलबे का कहर, शिमला-रिकांगपिओ एनएच घंटों बंद, प्रदेश में अलर्ट जारी

किन्नौर में तेज बारिश से बाढ़ और मलबे का कहर, शिमला-रिकांगपिओ एनएच घंटों बंद, प्रदेश में अलर्ट जारी

Heavy rains wreak havoc with floods and debris

Heavy rains wreak havoc with floods and debris

शिमला। Heavy rains wreak havoc with floods and debris, किन्नौर जिले में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे हुई तेज वर्षा से चोलिंग में बाढ़ के बाद आए मलबे से शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) बंद हो गया जोकि करीब 10 बजे तक बंद रहा। लगभग 30 मीटर हिस्से में मलबा जमा होने से एनएच बंद हो गया था।

इसी दौरान वहां से गुजर रही दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं, हालांकि दोनों कारें वहीं रुक गईं। इससे बड़ा हादसा टल गया। वहीं, रिब्बा में बाढ़ आने से रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी मलबा आने के कारण वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया है।

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प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान शिमला के जुब्बड़हट्टी में 44, मंडी के बलद्वाड़ा में 32, सराहन में 27, बिलासपुर में 26 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। दिन के तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान में सबसे अधिक वृद्धि कुल्लू के भुंतर में 6.2, मनाली में 5.5, मंडी में 5.2, केलंग में 4.7 डिग्री सेल्सियस की आई है। न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस का अंतर आया है।

कुछ स्थानों पर वृद्धि तो कुछ में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने पांच जुलाई से मानसून की सक्रियता और बढ़ने की संभावना जताई है। 12 जुलाई तक प्रदेश में भारी वर्षा का आरेंज व यलो अलर्ट जारी किया गया है।

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जून में 1901 से लेकर अब तक की 44वीं सबसे कम वर्षा

प्रदेश में जून में इस बार 64.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जो 1901 से लेकर अब तक 44वीं सबसे कम वर्षा रही। यह सामान्य से 36 प्रतिशत कम रही। मंडी में सबसे अधिक 115 मिलीलीटर वर्षा दर्ज की गई।

बादल फटने व वर्षा से तीन दिन में 16 करोड़ रुपये का नुकसान

प्रदेश में मानसून के प्रवेश से लेकर अभी तक लगभग 16 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। तीन दिन के दौरान प्रदेश में 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है।

किन्नौर में तीन दिन में 18.3 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक है। लाहुल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। मानसून के प्रवेश के साथ ही बादल फटने और भूस्खलन के कारण अभी भी 49 सड़कें और तीन ट्रांसफार्मर बंद हैं।