राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा; दान चोरी में भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे, अभी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी

Champat Rai resigned Ayodhya Ram Mandir Chanda Chori Case

Champat Rai resigned Ayodhya Ram Mandir Chanda Chori Case

Ram Mandir Champat Rai resigned: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों और आभूषणों के घपले के मामले में योगी सरकार सख्त रुख अपना रही है और SIT की शुरुवाती जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। इस बीच 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है। चंपत राय ने नैतिक आधार पर महासचिव का पद छोड़ने की बात कही है। वहीं चंपत राय के अलावा ट्रस्ट के एक सदस्य अनिल मिश्रा का भी इस्तीफा सामने आया है।

दान चोरी में भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे

राम मंदिर दान चोरी मामले में चंपत राय की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे। एक तरफ जहां सोशल मीडिया पर कई लोगों को चंपत राय को निशाना बनाते देखा गया तो वहीं विपक्ष के नेताओं ने भी चंपत राय पर खुला हमला बोला। वहीं हालिया घटनाक्रम में जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का दौरा किया था तो बताया गया कि योगी ने अपने दौरे के दौरान चंपत राय को उनसे दूर रखे जाने का निर्देश दिया था। यही वजह रही कि चंपत राय को अयोध्या में योगी आदित्यनाथ के आसपास नहीं देखा गया।

अभी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी; अब 8 लोग गिरफ्तार: FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू, 23 जून को SIT ने ACS होम को जांच रिपोर्ट सौंपी

जानिए चंपत राय के बारे में

कौन हैं चंपत राय (Who Is Champat Rai)। 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना कस्बे में जन्मे चंपत राय (चंपत राय बंसल) पूर्व में लेक्चरर रह चुके हैं। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक प्रमुख नेता हैं। 1975 में आपातकाल के दौरान आरएसएस से जुड़े होने के कारण चंपत राय को गिरफ्तार कर लिया गया था और करीब 18 महीने जेल में बिताने पड़े। जेल से रिहा होने के बाद चंपत राय ने अध्यापन कार्य छोड़ दिया था और पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में संघ से जुड़ गए थे।

राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही

चंपत राय 1991 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के क्षेत्रीय संगठन मंत्री बने। 1996 में केंद्रीय मंत्री और 2002 में अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के पद पर रहे। इसके अलावा वे विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। चंपत राय की राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका रही। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान चंपत राय भी कारसेवकों के साथ सक्रिय रूप से मौजूद थे। यह राम मंदिर आंदोलन के रूप में इस कड़ी की सबसे बड़ी घटना दर्ज हुई।

'रामलला के पटवारी' कहे गए चंपत राय

चंपत राय की पहचान 'रामलला के पटवारी' के रूप में रही है। उन्हें 'अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया' भी कहा जाता है क्योंकि राम जन्मभूमि विवाद और ऐतिहासिक दस्तावेजों की उन्हें गहन जानकारी थी। उन्होंने कानूनी लड़ाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकीलों को जुटाने और सबूत व दस्तावेज पेश करने में अहम भूमिका निभाई। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट का गठन हुआ, तो उन्हें महासचिव नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मंदिर निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और दान की देखरेख का काम संभाला।