लखनऊ अग्निकांड का मुख्य आरोपी निकला पुराना 'पेपर लीक' मास्टरमाइंड: सीपीएमटी (CPMT) कांड से जुड़े हैं सुरेंद्र शुक्ला के तार
Prime accused in Lucknow fire incident
लखनऊ। Prime accused in Lucknow fire incident, अलीगंज की जिस अवैध इमारत में 15 मासूम जिदंगियां जलकर खाक हो गईं, उसके सह मालिक सुरेंद्र शुक्ल का नाम पीएमटी पेपर लीक में भी आ चुका है।
सुरेंद्र पर पीएमटी का पेपर लीक करने के आरोप लगने के बाद उसके खिलाफ पुलिस ने एफआइआर भी दर्ज की थी। एसटीएफ ने जांच के बाद रामेश्वर इंस्टीट्यूट के संचालक सुरेंद्र शुक्ला के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उसको बरी कर दिया गया था।
2015 का है मामला
मामला सीपीएमटी 2015 पेपरलीक कांड से जुड़ा है। सुरेंद्र की बेटी टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के फैजाबाद रोड स्थित कालेज श्री नारायण इंस्टीट्यूट में सीपीएमटी की परीक्षा दे रही थी। उसको पास कराने के लिए सुरेंद्र ने ही पेपरलीक की साजिश रची।
अपने बड़े भाई और सोमवार को खाक हुई इमारत के दूसरे मालिक वीरेंद्र शुक्ला के साथ मिलकर सुरेंद्र ने प्रॉपर्टी कारोबार कर करोड़ों कमाए। अफसरों की मिलीभगत से दोनों ने किसानों से औने-पौने दामों पर जमीनें खरीदीं। लखनऊ से लेकर सीतापुर तक दोनों ने सीलिंग जमीनों पर भी कब्जा कर प्लाटिंग की।
सुरेंद्र ने अपने बेटी को पास कराने के लिए श्री नारायण इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल व परीक्षा केंद्र के अधीक्षक डॉ. निमेष सिंह और प्रो. अरुण कुमार शुक्ला से संपर्क कर बेटी की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए उसे अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाने के लिए कहा।
बात नहीं बनी तो बेटी के परीक्षा कक्ष में अपने विजिलेटर रखने को कहा, जिस सहमति बन गई। सुरेंद्र ने अपने इंस्टीट्यूट से ही अशोक त्रिपाठी व अंकुर श्रीवास्तव को इनविजिलेटर बनाकर भेज दिया। परीक्षा में ‘सी’ सिरीज का पेपर लीक हुआ था, जो रामेश्वरम इंस्टीट्यूट से निकलने की बात सामने आई थी।
विवेचना में सुरेंद्र के नाम के साथ ही रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल व पीआरओ अभय पांडेय का नाम भी प्रकाश में लाया गया था लेकिन जांच के बाद विवेचक ने केवल सुरेंद्र का नाम काम्प्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की।