उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की बड़ी कार्रवाई: संयुक्त निदेशक शेष नाथ पाण्डेय सेवा से बर्खास्त
Uttar Pradesh Minority Welfare Department takes major action
लखनऊ। Uttar Pradesh Minority Welfare Department takes major action:- प्रदेश सरकार ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों में घिरे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेष नाथ पाण्डेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वर्ष 2022 में शुरू हुई विभागीय कार्रवाई में लगाए गए 15 में से 14 आरोप जांच में सही पाए जाने के बाद उप्र लोक सेवा आयोग की सहमति से उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया है।
लखनऊ की तत्कालीन मण्डलायुक्त की जांच में 15 में से 14 आरोप मिले थे सही
पांडेय को भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के तत्कालीन रजिस्ट्रार शेष नाथ पाण्डेय पर आरोप है कि उन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा बर्खास्तगी की पुष्टि होने के बावजूद आजमगढ़ के मदरसा बाबुल इल्म की शिक्षिका शगुफ्ता बानो को अवैध रूप से सेवानिवृत्त दिखाकर वेतन, चिकित्सीय अवकाश वेतन, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान कराया।इसके अलावा मदरसा जामिया इस्लामिया मदनपुरा में परिचारक पद पर नियुक्त मो. आसिफ की नियुक्ति फर्जी व कूटरचित अभिलेखों के आधार पर पाए जाने के बावजूद उसके वेतन भुगतान का आदेश पारित किया गया।
मदरसा बोर्ड में रजिस्ट्रार पद पर तैनाती के दौरान की गईं अनियमितताओं के मामले में हुई कार्रवाई
वहीं देवरिया के मदरसा इस्लामिया महुआरी पथरदेवा के बर्खास्त शिक्षक अशरफ अली के मामले में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के सेवा में पुनर्बहाली कर एक ही पद पर दो व्यक्तियों के वेतन भुगतान की स्थिति उत्पन्न कर दी गई।इन आरोपों को प्रथमदृष्टया गंभीर मानते हुए सरकार ने एक जुलाई 2022 को उन्हें निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय/अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की थी। मामले की जांच लखनऊ की तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब को सौंपी गई थी। जांच में 15 में से 14 आरोप सही पाए गए। हालांकि निदेशालय में अधिकारियों की कमी के कारण उन्हें एक-डेढ़ माह बाद ही बहाल कर दिया गया था।
जुलाई में पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका अभ्यावेदन मांगा था
सरकार ने रोशन जैकब की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर पिछले वर्ष जुलाई में पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका अभ्यावेदन मांगा था। अंतिम निर्णय से पहले व्यक्तिगत सुनवाई के लिए भी उन्हें तीन अवसर दिए गए, लेकिन पाण्डेय उपस्थित नहीं हुए। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव संयुक्ता समद्दार ने 30 जनवरी को चौथा व अंतिम अवसर वीडियो कान्फ्रेंसिंग से सुनवाई का दिया किंतु इसमें भी पाण्डेय अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
इस बीच उन्होंने अनुशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की, जिसे जनवरी 2026 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने विशेष अपील दायर की है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने दंड देने के लिए प्रकरण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा, जिस पर आयोग ने 28 फरवरी को सहमति प्रदान कर दी। इसके बाद सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
शमशुल हुदा मामले में पिछले वर्ष नवंबर से थे निलंबित
शेष नाथ पाण्डेय पिछले वर्ष नवंबर में शमशुल हुदा प्रकरण में फिर से निलंबित कर दिए गए थे। आजमगढ़ के तत्कालीन मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा को विदेश में रहने के दौरान नियम विरुद्ध वेतन, पेंशन व अन्य देयों का भुगतान किया गया था। पाण्डेय ने अपने निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए निलंबन बहाल कर दिया था। सरकार ने उनका निलंबन बहाल करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ एसएलपी दाखिल कर दी है।
बर्खास्तगी के खिलाफ न्यायालय में देंगे चुनौती
शेष नाथ पाण्डेय बर्खास्तगी के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर पहले से ही हाई कोर्ट में विशेष अपील दाखिल कर चुके हैं। बर्खास्तगी का यह आदेश विधि मान्य नहीं है।