उत्तर प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला, दो जल परियोजनाओं में वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला, दो जल परियोजनाओं में वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी

Uttar Pradesh cabinet takes major decision

Uttar Pradesh cabinet takes major decision

लखनऊ। Uttar Pradesh cabinet takes major decision, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को मंगलवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना में प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वहीं उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से के रूप में 356.07 करोड़ रुपये का व्यय होगा।

परियोजना की लागत 6 हजार करोड़ से ज्यादा

रेणुकाजी बांध परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपये है, जबकि जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत 148 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है। बांध की जल संचयन क्षमता 498 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) और लाइव स्टोरेज क्षमता 330 एमसीएम होगी। परियोजना से 40 मेगावाट बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित है।

लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1162.66 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना के माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में सिंचाई के लिए किया जाएगा।

इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

204 मीटर ऊंचा होगा बांध

वहीं लखवार बहुउद्देश्यीय परियोजना की पुनरीक्षित लागत 5747.17 करोड़ रुपये है। परियोजना के तहत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट क्षमता का भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज के साथ संतुलन जलाशय का निर्माण किया जा रहा है।

परियोजना में लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1146.69 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है।

परियोजना से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित लाभार्थी राज्यों के लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 78.83 एमसीएम जल तथा 300 मेगावाट (572.54 मिलियन यूनिट) आकस्मिक विद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उप्र को 3.721 बिलियन क्यूबिक मीटर (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा।