यूटी पुलिस ने फेक करंसी छापने और सप्लाई करने वाले एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को किया काबू
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यूटी पुलिस ने फेक करंसी छापने और सप्लाई करने वाले एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को किया काबू

UT Police have busted an Inter-State Network

UT Police have busted an Inter-State Network

पकड़े गए आरोपियो के कब्जे से भारी मात्रा में फेक करंसी,एक वाहन,प्रिंटर,लैपटॉप,टैबलेट,प्रिंटिंग इंक, कागज की शीट आदि भी बरामद किए गए हैं।

रंजीत शम्मी चंडीगढ़। UT Police have busted an Inter-State Network: यूटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फेक करंसी छापने और सप्लाई करने वाले एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पकड़े गए आरोपियो के कब्जे से भारी मात्रा में फेक करंसी,एक वाहन,प्रिंटर,लैपटॉप,टैबलेट,प्रिंटिंग इंक, कागज की शीट आदि भी बरामद किए गए हैं।आरोपियों की पहचान जिला जम्मू,जम्मू कश्मीर के रहने वाले 25 वर्षीय अविनाश कुमार,नई दिल्ली के रहने 20 वर्षीय सत्यम विश्वकर्मा,हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ निवासी 27 वर्षीय संदीप, यूपी के जिला सहारनपुर निवासी 22 वर्षीय अब्दुल्ला और 22 वर्षीय शहजाद के रूप में हुई है। पुलिस ने उक्त आरोपी अविनाश के कब्जे से कुल फेक करंसी 164 x 500 = 82 हजार,94 x 200 = 18 हजार 800 रुपए,4 x 50 = 200,कुल मूल्य 1,01,000 के अलावा सफेद रंग की चंडीगढ़ नबर ब्रेजा कार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।आरोपी सत्यम विश्वकर्मा के कुल फेक करंसी भारतीय 803 x 500 = 401500,374 x 200 = 74800,कुल - 4,76,300/- रुपये आरोपी न्यायिक हिरासत में।आरोपी संदीप के कब्जे से फेक भारतीय करेंसी नोट 500x41 = 20500,5 x 100 = 500,कुल – 20,500/- रुपये इसके अलावा एक एप्सन प्रिंटर,एक ब्रदर प्रिंटर,एक डेल लैपटॉप,एक मैकबुक,और एक रियलमी टैबलेट,खाकी रैप में मिले सफेद बॉन्ड पेपर आरोपी न्यायिक हिरासत में। आरोपी अब्दुल्ला के कब्जे से कुल फेक भारतीय करेंसी नोट।20 x 500 = 10 हजार,4 x 100 = 400 रुपए,कुल - 10 हजार 400 रुपये के अलावा एक सफेद मल्टी-लेजर कलर प्रिंटर के साथ वोल्टेज स्टेबलाइजर,आरोपी न्यायिक हिरासत में।आरोपी शहजाद के कब्जे से कुल फेक भारतीय भारतीय करेंसी नोट,200 x 500 = 1 लाख रुपए,24 x 200 = 4800 रुपए,44 x 100 = 4400 रुपए,कुल – 1लाख 9 हजार 200 रुपए के अलावा लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य प्रिंटिंग का सामान। कुल 1777 एफआईसीएन नोट,जिनकी कीमत 7 लाख 17 हजार 400 रुपये है।

क्या था मामला

जानकारी के अनुसार पता चला कि यूटी पुलिस की टीम 19 दिसबर को सैक्टर 43 स्थित आईएसबीटी के पास गश्त पर थी।इसी दौरान पुलिस को आरोपी अविनाश कुमार के बारे में विशेष जानकारी मिली कि जो जम्मू कश्मीर का रहने वाला है।और राजस्थान पुलिस द्वारा वांछित था।और वर्तमान में गांव कजहेडी सेक्टर-52 चंडीगढ़ में एक पीजी आवास में रह रहा था।तुरंत कार्रवाई करते हुए,विभिन्न पीजी और होटलों की जाँच की गई। पुलिस ने गांव कजहेड़ी से आरोपी अविनाश कुमार को पकड़ा गया और उसके बैग से 500,200 और 50 के फेक नोटों की शीट और नोट बरामद किए गए। पुलिस ने उसके साथी आरोपी सत्यम विश्वकर्मा को भी उसी पीजी से पकड़ा।उनके पास से और कमरे की तलाशी से,एक लाख मूल्य की फेक करेंसी के साथ-साथ स्टैम्पिंग फॉयल और करेंसी प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया।पुलिस की आगे की जांच के दौरान 20 दिसबर 2025 को आरोपी सत्यम के खुलासे पर उसी इलाके के पास खड़ी एक सफेद चंडीगढ़ नंबर की ब्रेज़ा कार की तलाशी ली गई और 4 लाख 76 हजार 300 रूपए मूल्य के एफआईसीएन (500 के 803 नोट और 200 के 374 नोट) भी बरामद किए गए।उनके खुलासे के बयानों के आधार पर आरोपी संदीप (महेंद्रगढ़, हरियाणा),अब्दुल्ला और शहजाद (दोनों सहारनपुर जिले, यूपी के निवासी) को गिरफ्तार किया गया।यह गिरोह पूरे उत्तर भारत में सक्रिय था और फेक करेंसी खरीदने और फैलाने के लिए सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप का इस्तेमाल करता था। 
वे फेक नोट बनाने के लिए प्रिंटर और स्टैम्पिंग फॉयल का भी इस्तेमाल करते थे।

काम करने का तरीका:

जानकारी के अनुसार पता चला कि पकड़े गए आरोपी सोशल मीडिया के ज़रिए एक-दूसरे से संपर्क कर। इसके बाद वे प्रिंटेड करेंसी के वीडियो/तस्वीरें भेजकर संभावित खरीदारों को लुभाते थे।भारतीय करेंसी नोट आमतौर पर 1:4 के अनुपात में बदले जाते थे।यानी 4 लाख रुपये के फेक भारतीय करेंसी नोट के लिए एक लाख असली करेंसी देनी होती थी।यह अनुपात तय नहीं था और आपसी समझ और मोलभाव के अनुसार बदलता रहता था।नकली भारतीय करेंसी नोट आमतौर पर कोरियर कंपनियों के ज़रिए भेजी जाती थी।लेकिन कई मामलों में इन्हें मैन्युअल रूप से भी डिलीवर किया जाता था।इन फेक भारतीय करेंसी नोटों को खरीदने वाले ग्राहक/खरीदार या तो इसे मुनाफ़ा कमाने के लिए कम अनुपात में आगे बेचते थे। या पहचान से बचने के लिए इसे असली नोटों के बंडलों में मिला देते थे।इस तरह फेक भारतीय करेंसी नोटों को सार्वजनिक चलन में लाते थे।पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपी अब्दुल्ला बीबीए अंतिम बर्ष का छात्र है।और अपना हस्तशिल्प का काम और आरोपी शहजाद मोटर साइकिल पर कपड़े बेचने का काम जबकि तीन उक्त आरोपी कुछ नहीं करते थे।