यूपी की ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि: एसजीपीजीआई (SGPGI) में राज्य का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण

यूपी की ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि: एसजीपीजीआई (SGPGI) में राज्य का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण

UP Historic Medical Achievement

UP's Historic Medical Achievement

लखनऊ। UP's Historic Medical Achievement, उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के इतिहास में रविवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, जब संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), ने राज्य का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण कर नई चिकित्सा उपलब्धि हासिल की।

यह जटिल प्रत्यारोपण एक ऐसे मरीज में किया गया, जो डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियां अत्यधिक कमजोर हो जाती हैं और शरीर को पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पातीं, जिससे मरीज गंभीर हार्ट फेल्योर की स्थिति में पहुंच जाता है। चिकित्सकों के अनुसार मरीज की जान बचाने के लिए हृदय प्रत्यारोपण ही अंतिम विकल्प बचा था।

इस ऐतिहासिक प्रत्यारोपण के लिए हृदय दिल्ली से लाया गया। दिल्ली के एक डोनर ने मृत्यु के बाद अपने हृदय, लिवर और गुर्दे दान किए थे। लिवर और गुर्दों का प्रत्यारोपण दिल्ली में ही किया गया, जबकि हृदय को विशेष एयर एम्बुलेंस से तत्काल लखनऊ भेजा गया।

लखनऊ पहुंचने पर प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिससे दाता हृदय को न्यूनतम समय में एसजीपीजीआई पहुंचाया जा सका।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हृदय प्रत्यारोपण में समय सबसे अहम होता है, क्योंकि दाता हृदय को सीमित समय के भीतर प्रत्यारोपित करना अनिवार्य होता है। इस जटिल सर्जरी की सफलता कई विभागों के अभूतपूर्व तालमेल का परिणाम रही।

एसजीपीजीआई के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग, कार्डियोलॉजी विभाग, एनेस्थीसिया विभाग, राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एसओटीटीओ), रोट्टो तथा दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की टीमों ने मिलकर इस मिशन को सफल बनाया।

एसजीपीजीआई निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बहु-अंग प्रत्यारोपण प्रणाली के नए युग की शुरुआत है।

उन्होंने कहा कि संस्थान पहले से गुर्दा प्रत्यारोपण में अग्रणी रहा है और हाल के वर्षों में लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम को भी मजबूती मिली है। अब हृदय प्रत्यारोपण शुरू होने से एसजीपीजीआई एक समग्र बहु-अंग प्रत्यारोपण केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही एसजीपीजीआई को क्वाटर्नरी केयर सेंटर के रूप में मान्यता दे चुकी है। 11 प्रस्तावित बहुविषयक सुपर स्पेशियलिटी शाखाओं और बहु-अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार के साथ संस्थान देश के अग्रणी उन्नत चिकित्सा केंद्रों में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहा है।

इस उपलब्धि पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एसजीपीजीआई टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और इससे गंभीर हृदय रोगियों को राज्य में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार बहु-अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रमों को हर संभव सहयोग देती रहेगी। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि एयर एम्बुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश अब जटिल चिकित्सा चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।

ऑपरेशन में शामिल प्रमुख टीम

सीवीटीएस विभाग से प्रो. एस.के. अग्रवाल, प्रो. शांतनु पांडे, प्रो. मिलिंद होते, डॉ. विजय अग्रवाल सहित विशेषज्ञ सर्जनों ने प्रत्यारोपण का नेतृत्व किया। कार्डियोलॉजी विभाग से प्रो. आदित्य कपूर, प्रो. रूपाली खन्ना, प्रो. सत्येन्द्र तिवारी और डॉ. अंकित साहू ने मरीज की हृदय संबंधी निगरानी संभाली। एनेस्थीसिया टीम में प्रो. पुनीत गोयल, डॉ. अमित रस्तोगी, डॉ. पल्लव सिंह समेत कई विशेषज्ञ शामिल रहे। परफ्यूज़निस्ट राज कुमार यादव और संदीप कुमार तथा नर्सिंग स्टाफ ने पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह ऐतिहासिक सफलता न केवल एक मरीज को नया जीवन देने की कहानी है, बल्कि उत्तर प्रदेश को अंग प्रत्यारोपण के राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम भी है।