यूपी की जेलों को सुधार और कौशल विकास केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
UP Jails Should Be Transformed into Reform
लखनऊ। UP Jails Should Be Transformed into Reform, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश की जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के जरिए जेलों को नई पहचान दी जाए।
जेल केवल पेशेवर अपराधियों और माफिया के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों में ‘ओपन जेल’ की व्यवस्था अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने ‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने 75 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त बंदियों, बच्चों के साथ जेल में रह रहीं महिला कैदियों तथा केवल जमानत राशि जमा न कर पाने के कारण जेल में बंद लोगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।
वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। अब ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।
वर्ष 2017 के बाद चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार शुरू किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है।
इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला जेलों के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 30 ड्रोन कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और 195 बाडी वार्न कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कान्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जेलों में कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं। इनमें सिलाई, दरी, कंबल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पाटरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
कारागार विभाग में रिक्त पदों को लेकर मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। विभागीय प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां और 2868 पदोन्नतियां दी जा चुकी हैं।