यूपी में पेड़ काटने पर दो साल का प्रतिबंध, 29 प्रमुख प्रजातियों शामिल
Two-year ban on tree felling in UP
लखनऊ। प्रदेश में आम, नीम, शीशम, सागौन, पीपल, बरगद, महुआ, बेल, जामुन सहित 29 प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध को सरकार ने दो वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है।
यह प्रतिबंध बीते 31 दिसंबर को खत्म हो गया था, किंतु सरकार ने 31 दिसंबर 2027 तक के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया है। बिना वन विभाग की पूर्व अनुमति के इन्हें काटना गैरकानूनी है, जिस पर एफआइआर, आर्थिक जुर्माना और छह महीने तक की जेल तक हो सकती है।
पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रतिबंधित प्रजातियाें में आम (कलमी/तुकमी), नीम, साल, महुआ, बीजा साल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम एवं सागौन शामिल हैं।
इन पेड़ों को निजी या सरकारी जमीन से काटने से पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होती है। अनुमति के लिए आनलाइन आवेदन करना होता है। इसके साथ ही अब प्रति पेड़ 10 नए पौधे लगाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने का शपथपत्र भी देना अनिवार्य है।
नियमों के अनुसार, एक पेड़ काटने पर 10 नए पौधे लगाने या इसके लिए वन विभाग को प्रतिपूर्ति राशि जमा करनी अनिवार्य है।
वन विभाग एक पौधे के लिए 100 रुपये जमा कराता है यानी 10 पौधों के लिए एक हजार रुपये के साथ ही पौधों के रोपण का खर्च भी अलग से लिया जाता है। रोपण का खर्च प्रभागवार अलग-अलग होता है। इसे जमा करने के बाद पेड़ काटने की अनुमति मिल जाती है।