योगी सरकार का 'गो-टेक' मॉडल: अब गोशालाएं बनेंगी बायो-सीएनजी और ऑर्गेनिक उत्पादों का हब

योगी सरकार का 'गो-टेक' मॉडल: अब गोशालाएं बनेंगी बायो-सीएनजी और ऑर्गेनिक उत्पादों का हब

The Yogi Governments Go-Tech Mode

The Yogi Government's 'Go-Tech' Mode

लखनऊ। The Yogi Government's 'Go-Tech' Mode, उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का बड़ा आधुनिक 'टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट' बनकर उभरने वाला है। प्रदेश की गोशालाओं को अब सिर्फ पशुओं के आश्रय तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो सेवा आयोग ने 'पंचगव्य वैल्यू चेन' (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) पर काम करते हुए 100 से ज्यादा उत्पाद तैयार कर एक विशाल ऑर्गेनिक मार्केट तैयार करने का खाका खींच लिया है। इसमें आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसी से बायोगैस प्लांट स्थापित कर बायो-सीएनजी तैयार की जाएगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को जमीन पर उतारने के लिए देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का पहला प्रयोग जालौन जिले की गोशालाओं से शुरू किया जा रहा है। यहां बायोगैस प्लांट स्थापित कर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। जालौन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इस हाईटेक मॉडल को पूरे प्रदेश की गोशालाओं में लागू किया जाएगा।

गोशालाओं को पूरी तरह स्वावलंबी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रो. वीके विजय विशेष सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेक्निकल टीम गांवों में जाकर स्किल ट्रेनिंग देगी। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय लोगों को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।

उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी टीम

वहीं, सॉफ्टवेयर कंपनी से करोड़ों का पैकेज छोड़कर आए आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज और उनकी टीम इन उत्पादों को तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग और बिक्री तक मदद करेगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम का लाभ प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी होगा। पंचगव्य के जरिए बनाए गए उनके उत्पादों का बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके साथ ही गांव-गांव स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे होंगे। एक ओर जहां गोवंश का सुरक्षित संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और छोटे किसानों के लिए रोजगार व अतिरिक्त आय के नए द्वार खुलेंगे। तकनीक और परंपरा का यह संगम गांवों में आजीविका का एक बिल्कुल नया और स्थायी मॉडल पेश करने जा रहा है।

योजना की महत्वपूर्ण बातें

  • गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से तैयार होंगे 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद।
  • पहले चरण में जालौन की गोशालाओं को बनाया जा रहा है हाईटेक और स्वावलंबी।
  • बायोगैस प्लांट चलाने और उत्पाद बनाने के लिए आईआईटी विशेषज्ञ दे रहे ट्रेनिंग।
  • गोसंरक्षण के साथ-साथ छोटे पशुपालकों और स्थानीय युवाओं की आय बढ़ाने का सीधा जरिया।