यूपी की सियासत में नया उबाल: पश्चिम में निषाद-कश्यप समाज की हुंकार, क्या बदलेगी सोशल इंजीनियरिंग?

यूपी की सियासत में नया उबाल: पश्चिम में निषाद-कश्यप समाज की हुंकार, क्या बदलेगी सोशल इंजीनियरिंग?

The Roar of the Nishad-Kashyap Community in the West

The Roar of the Nishad-Kashyap Community in the West

लखनऊ। The Roar of the Nishad-Kashyap Community in the West, पश्चिम यूपी में जातीय राजनीति का नया दौर चल रहा है। दादरी में गुर्जरों एवं मेरठ में जाटों के सम्मेलन की गर्माहट थमी भी नहीं कि रविवार को महर्षि कश्यप जयंती के बहाने कश्यप-निषाद समाज ने अनुसूचित जाति का दर्जा मांगते हुए बड़ी राजनीतिक तान छेड़ दी।

प्रदेश सरकार में मंत्री व भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप ने गाजियाबाद में रामलीला मैदान में महर्षि कश्यप जयंती महाकुंभ आयोजित किया, जहां उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।

वहीं, चंद किलोमीटर दूर नोएडा के इनडोर स्टेडियम में निषाद पार्टी के अध्यक्ष एवं मंत्री डा. संजय निषाद गुर्जर-निषाद सम्मेलन कर नया राजनीतिक संदेश गढ़ते नजर आए। दोनों सम्मेलनों में निषाद-कश्यप समाज से जुड़ी सात समतुल्य जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग उठाई गई। वहीं, निषाद पार्टी ने पश्चिम उप्र में अपनी चुनावी जमीन मजबूत कर सहयोगी दल पर दबाव बढ़ाने की कसरत भी शुरू कर दी।

मिशन 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल रणनीति को धार देने में जुटे हैं। भाजपा की रणनीति को धार देते हुए मंत्री नरेंद्र कश्यप 30 ऐसी ओबीसी जातियों के बीच पकड़ बढ़ाने का होमवर्क कर रहे हैं, जिनका वोट ज्यादातर सीटों पर जीत-हार का फैसला करने की स्थिति में है। उन्होंने छह मार्च को निषाद-कश्यप सम्मेलन किया, जहां कई राज्यों से लोग पहुंचे थे।

इसी कड़ी में ठीक एक माह बाद महर्षि कश्यप की जयंती पर निषाद-कश्यप महाकुंभ नामक कार्यक्रम आयोजित किया गया। नरेंद्र कश्यप का कहना है कि ‘हम अपने समाज को सांस्कृतिक जड़ों के साथ भावनात्मक रूप से भी जोड़ रहे हैं। इस समाज की धार्मिक जड़ें बहुत गहरी हैं।’

गोरखपुर व प्रयागराज के बाद निषाद पार्टी ने नोएडा ‘गुर्जर-निषाद’ सम्मेलन के जरिए न सिर्फ समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को धार दी, बल्कि एक नई सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग किया। डा. संजय निषाद का कहना है कि दोनों जातियां लड़ाकू और रक्षक स्वभाव वाली रही हैं, ऐसे में समन्वय स्वाभाविक है। अब वाराणसी एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े सम्मेलन की योजना है।