उत्तर प्रदेश में बदली कृषि की तस्वीर: योगी आदित्यनाथ
The picture of agriculture has changed in Uttar Pradesh
लखनऊ। उत्तर जोन के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कृषि की तस्वीर बदली है। कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति और केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यूपी में ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा जमीन पर साकार हो रही है। वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं। निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग प्रदेशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। पिछले वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रमों में किसानों में अभूतपूर्व उत्साह दिखा था। अब तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं। वर्ष 2017 में प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की स्थापना और मौजूदा केंद्रों को सशक्त किया गया। आज सभी केवीके नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी नौ कृषि जलवायु क्षेत्राें में सेंटर आफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं।
जहां पहले किसान वर्ष में केवल एक फसल लेते थे, अब वहां तीन-तीन फसलें ली जा रही हैं। पहले किसानों को मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं था, लेकिन अब उन्हें जानकारी, संसाधन और बाजार तीनों उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र को स्वीकृति दी है। सेंटर स्थापित होने के बाद विभिन्न जिलों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना तेजी से होगी।
चार साल में सेब उत्पादन में नंबर वन होगा उत्तराखंड: गणेश जोशी
उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि उनकी सरकार कृषि के साथ उद्यान फसलों को बढ़ावा देने में जुटी है। इसी साल महक क्रांति शुरू की गई है, जिसमें सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की योजना है। इससे 50 हजार किसान जुड़े हुए हैं।
सात नई एरोमा वैली विकसित की जा रही हैं। कीवी की खेती और मिलेट्स को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में ड्रैगन फ्रूट और मशरूम को बढ़ाया जा रहा हें। उन्होंने कहा कि हिमाचल, कश्मीर के बाद सेब उत्पादन में उत्तराखंड तीसरे नंबर पर हैं। अब इसकी उन्नत प्रजातियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनसे पहले साल में ही फल मिलने लगता है। वर्ष 2030 तक उत्तराखंड सेब उत्पादन में पहले नंबर पर होगा।
सरकार की चुनौतियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि राज्य में बंदरों की सबसे बड़ी समस्या है। वर्ष 2022 के बाद घेरबाड़ के लिए केंद्र से पैसा मिलना बंद हाे गया था, अब राज्य सरकर के अनुराेध पर केंद्र ने 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं और इसमें से 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी मिल गई है। राज्य ने भी कृषि और उद्यान के लिए 10-10 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। जिला योजना से भी घेरबाड़ के लिए पैसा दिया जा रहा है।
पंजाब में दिया जाएगा औद्यानिक फसलों को बढ़ावा: महेंद्र भगत
पंजाब के उद्यान मंत्री महेंद्र भगत ने बताया कि उनके राज्य में अब अब औद्यानिक फसलों को बढ़ावा देने का काम हो रहा है। पंजाब को देश में अन्न देने वाला राज्य कहा जाता है। हमारे यहां धान-चावल की सबसे ज्यादा खेती होती है, परंतु अब फसल विविधीकरण की ओर काम शुरू किया गया है।
इस समय सबसे अधिक मूल्य उद्यान के उत्पादों को मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले पंजाब में कृषि क्षेत्रफल में से केवल तीन प्रतिशत पर ओद्यानिक फसलें होती थीं, परंतु अब इसे बढ़ाया जा रहा है। किसान ड्रैगन फ्रूट, लीची, आम आदि की ओर बढ़ रहे हैं। पंजाब में देश की सर्वाेत्तम गुणवत्ता वाली लीची होती है। उन्होंने कहा कि पंजाब और वहां के किसानों की खुशहाली के लिए फसल विविधिकरण सबसे ज्यादा जरूरी है।