“राज्य सरकार की मंजूरी के बाद शिमला नगर निगम में मेयर विवाद हुआ खत्म”
The mayoral dispute in Shimla Municipal Corporation has ended
शिमला। राजधानी शिमला की नगर निगम राजनीति में मेयर सुरेंद्र चौहान को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव अब खत्म होगा। राज्य सरकार की ओर से उनके कार्यकाल को लेकर स्थिति साफ होने के बाद अब भाजपा को उनके खिलाफ नया राजनीतिक मोर्चा तैयार करना होगा।
राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने मेयर के कार्यकाल को पांच साल तक जारी रखने का फैसला कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद मेयर के पद को लेकर चला विवाद अब खुद ही खत्म होगा, हालांकि भाजपा के हाथ में महिला के हक छीनने का मुद्दा फिर भी जीवंत रहेगा।
भाजपा बता रही थी असंवैधानिक
नगर निगम की पिछली बैठकों में इस मुद्दे पर काफी हंगामा देखने को मिला था। जब मेयर सुरेंद्र चौहान ने नगर निगम का बजट पेश करना शुरू किया तो भाजपा पार्षदों ने इसका विरोध करते हुए उनके पद पर बने रहने को असंवैधानिक बताया।
भाजपा पार्षदों ने किया था बजट का बहिष्कार
विरोध के चलते भाजपा पार्षदों ने बजट भाषण का बहिष्कार भी किया था। उस समय भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक मेयर के कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक वे उनके फैसलों का विरोध जारी रखेंगे। इस विवाद के कारण नगर निगम की बैठकों का माहौल भी काफी गर्माया रहा।
...तो महिला के हक का मामला उठाएगी भाजपा
शिमला नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान आने वाले समय में भी जारी रहने के आसार हैं। मेयर के कार्यकाल को लेकर विवाद भले ही कम हो गया हो, लेकिन महिला के हक मारने के मसले पर भाजपा ने रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। भाजपा इस मसले पर फिलहाल ज्यादा न करे, लेकिन हिमाचल में होने वाले चुनावों के दौरान पार्टी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।