विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

The Leader of the Opposition surrounded

The Leader of the Opposition surrounded

  1. चिकित्सा, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा।

  2. बेरोजगारी कम करने को रिक्त पदों पर भर्ती की मांग।

  3. निजी कॉलेज फीस नियंत्रण, जातीय जनगणना की वकालत।

लखनऊ। विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार को चिकित्सा, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घेरा, तो बीच-बीच में ऐसे तंज भी कसे कि सदन ठहाकों से गूंज उठा।

उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “हम तो 30-35 मिनट बोलते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को ढाई घंटे सुनना पड़ता है। किताब छापकर दे दीजिए ‘मुख्यमंत्री जी’ आपको भी कम बोलना पड़ेगा।”

इस पर मुख्यमंत्री समेत पूरा सदन हंस पड़ा। नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर सवाल उठाते हुए चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने की मांग की।

प्रदेश में बेरोजगारी दर को कम करने के लिए रिक्त पदों पर भर्ती का अनुरोध किया। कानून-व्यवस्था ठीक करने के लिए तहसीलों और जिलों में ही शिकायतों का निस्तारण करवाने की सलाह दी।

अपने 55 मिनट के उद्बोधन में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में ‘केवल मेडिकल कालेज खोलने से काम नहीं चलेगा, वहां इलाज और दवा की व्यवस्था हो। स्थिति यह है कि सिर्फ रेफर किया जा रहा है।’

पीजीआइ में बेड नहीं मिलते हैं। कहा कि उन्होंने संविदा के बजाय स्थायी भर्तियों पर जोर देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में संविदा नियुक्तियों पर रोक की मांग की। निजी कालेजों की फीस पर नियंत्रण के लिए कमेटी बनाने और जातीय जनगणना कराने की भी मांग की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि मुझे गंगा मैया ने बुलाया है और गंगा मैया ने देश सेवा का मौका भी दिया, लेकिन नमामि गंगे योजना का क्या हाल है? गंगा आज भी साफ नहीं हुई।

आप बजट ठीक कर दें तो गंगा मैया भी खुश हो जाएंगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस सरकार का यह आखिरी आम बजट है। इस बजट पर बहुत सारी बातें हो गईं, अब लौट के आने पर ही बात होगी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं हो रही, जबकि निजी स्कूल कम वेतन में बेहतर शिक्षा दे रहे हैं। “बड़े स्कूल का छात्र आइएएस बनता है, छोटे स्कूल का छात्र रिक्शा चालक,” कहकर उन्होंने बुनियादी शिक्षा सुधारने की जरूरत बताई।

बेरोजगारी पर उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के लोग पलायन को मजबूर हैं। निवेश केवल नोएडा तक सीमित न रहे, पूर्वांचल में भी छोटे उद्योग लगें।

न्यायिक और अन्य विभागों में रिक्त पद भरकर तहसील व जिला स्तर पर मुकदमों का निस्तारण हो, तभी कानून-व्यवस्था सुधरेगी।

अंत में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “अब चला-चली की बेला है, सजग हो जाइए, नहीं तो इधर यानी विपक्ष में आ जाएंगे।” उनके इतना कहते ही सदन में एक बार फिर हंसी गूंजी।