विधान सभा में गूंजा अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा

विधान सभा में गूंजा अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा

The issue of officials not picking up the phone

The issue of officials not picking up the phone

  1. अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने का मुद्दा विधान सभा में उठा।

  2. विपक्ष ने अधिकारियों पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप लगाया।

  3. सरकार ने ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

लखनऊ। विधान सभा में मंगलवार को एक बार फिर विपक्ष ने अधिकारियों पर निशाना साधा। कहा कि विधान सभा अध्यक्ष की पीठ से कई बार निर्देश देने के बावजूद अधिकारी जनप्रतिनिधियों का फोन तक नहीं उठाते हैं, दलाली में व्यस्त रहते हैं।

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि कार्यपालिका लोकतंत्र को कमजोर करने में लगी हुई है। सपा के कमाल अख्तर ने कहा कि यह समस्या केवल विपक्ष की नहीं बल्कि सत्ता पक्ष की भी है। मंत्रियों व विधायकों तक की अधिकारी बात नहीं सुन रहे हैं। सत्ता पक्ष के विधायकों व मंत्रियों तक को धरना तक देना पड़ रहा है।

यह मामला नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने उठाया। कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश अधिकारी कर रहे हैं। थानेदार तो कभी जनप्रतिनिधियों का फोन तक नहीं उठाते हैं। पीठ के माध्यम से एक बार फिर कड़ा संदेश जाना चाहिए।

सपा की डा. रागिनी ने कहा कि यदि अधिकारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग में व्यस्त हैं तो उन्हें बाद में फोन कर लेना चाहिए लेकिन व्यवहार में ऐसा हो नहीं रहा है। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार उन अधिकारियों के साथ नहीं है जो ऐसा करते हैं।

सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि सभी जनप्रतिनिधियों के नंबर नोट रखे और काल मिस हो जाने पर उन्हें अपनी तरफ से काल करें। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने एक सुझाव दिया कि फोन न उठने पर विधान सभा की ओर से एक नंबर जारी किया जाए जिसे सभी अधिकारियों को सेव कराया जाए।

जनप्रतिनिधि का अगर फोन न उठे तो वह इस नंबर पर काल करके शिकायत कर सकते हैं। यहां से फोन अधिकारी के पास करके उससे कहा जाए फलां जनप्रतिनिधि को तत्काल फोन करें। विधान सभा अध्यक्ष ने सभी की बातें सुनने के बाद इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।