अयोध्या–काशी–मथुरा में बढ़ते श्रद्धालुओं से बदला पर्यटन का स्वरूप, योगी सरकार की होमस्टे नीति बनी रोजगार का नया आधार
The influx of devotees in Ayodhya, Kashi,
लखनऊ। The influx of devotees in Ayodhya, Kashi, उत्तर प्रदेश में अयोध्या के भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प और मथुरा-वृंदावन में रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण किफायती आवास की मांग तेजी से बढ़ी है। पर्यटकों की इस जरूरत को पूरा करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति' गेमचेंजर साबित हो रही है। इस योजना के तहत अब तक पूरे प्रदेश से 3,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से करीब 900 होमस्टे और फार्मस्टे सफलतापूर्व पंजीकृत होकर संचालित हो रहे हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से इन आवेदनों में आई भारी तेजी यह दर्शाती है कि आम जनता अब पर्यटन को स्वरोजगार के एक बड़े माध्यम के रूप में देख रही है।
बड़े शहरों के साथ अब बुंदेलखंड भी बना पर्यटन का नया हब
पर्यटन विभाग के विश्लेषण के अनुसार, वाराणसी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज और लखनऊ जैसे प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक शहर 'शहरी होमस्टे' श्रेणी में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, 'ग्रामीण होमस्टे मॉडल' में सबसे अप्रत्याशित और सकारात्मक बदलाव बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां झांसी, बांदा, हमीरपुर और महोबा जैसे जिले नए पर्यटन केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। इसके अतिरिक्त तराई और अन्य क्षेत्रों के बाराबंकी, बहराइच, पीलीभीत और लखीमपुर भी ग्रामीण पर्यटन के नक्शे पर तेजी से चमक रहे हैं, जहाँ देश-विदेश के पर्यटक ग्रामीण परिवेश और शुद्ध खान-पान का अनुभव लेने पहुंच रहे हैं।
पलायन पर लगेगी रोक
यह नीति छोटे जिलों और ग्रामीण इलाकों से बड़े शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में मददगार साबित हो रही है। इस मॉडल के तहत स्थानीय परिवार अपने खाली कमरों को आय के अतिरिक्त और सुरक्षित साधन में बदल रहे हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से रिटायर्ड कर्मचारियों, बुजुर्ग दंपतियों और महिलाओं द्वारा संचालित परिवारों के लिए घर बैठे सम्मानजनक कमाई का जरिया बन गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सरकार के विजन को साझा करते हुए कहा कि पर्यटन का असली लाभ तब है जब वह सीधे गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे। होमस्टे मॉडल से खाली पड़े घर आय के साधन बन रहे हैं। हमारी कोशिश है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ केवल बड़े होटलों तक सीमित न रहकर घर-घर तक पहुंचे।
पंजीकरण के नियम और श्रेणियां
पर्यटन विभाग ने इस योजना के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन रखा है। इच्छुक भवन स्वामी आधिकारिक पोर्टल https://up-tourismportal.in/application/bnb/login पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। नीति के तहत मुख्य रूप से तीन श्रेणियां तय की गई हैं।
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शहरी होमस्टे: ऐसे आवासीय भवन जिनमें मकान मालिक स्वयं रहता हो। इसमें वह पर्यटकों के लिए अधिकतम 06 कमरे (कुल 12 बेड) किराए पर दे सकता है।
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बेड एंड ब्रेकफास्ट: ऐसे भवन जहां मालिक स्वयं निवास नहीं करता है, वहां भी अधिकतम 06 कमरे पर्यटकों को दिए जा सकते हैं, लेकिन वहाँ एक केयरटेकर रखना अनिवार्य होगा।
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ग्रामीण होमस्टे: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ऐसे मकान जहां मालिक स्वयं रहता हो और उसके पास पर्यटकों के लिए अधिकतम 06 कमरे उपलब्ध हों।
आवासीय दरों पर टैक्स और कर्मचारियों को मुफ्त ट्रेनिंग की सुविधा
योगी सरकार इस नीति के तहत पंजीकरण कराने वाले संचालकों को कई प्रकार की रियायतें और प्रोत्साहन दे रही है।
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घरेलू दर पर टैक्स: होमस्टे व्यावसायिक गतिविधियों में गिने जाने के बावजूद इनसे बिजली बिल, हाउस टैक्स, वॉटर टैक्स और सीवर टैक्स का भुगतान आवासीय दरों पर ही लिया जाएगा।
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सौर ऊर्जा सब्सिडी: 'प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली योजना' के अंतर्गत इन भवनों की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए विशेष सब्सिडी दी जाएगी।
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निःशुल्क प्रशिक्षण: पर्यटन विभाग के मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान द्वारा होमस्टे के 8 सहायक कर्मचारियों को मुफ्त कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Training) दिया जाएगा।
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मुफ्त प्रचार: पंजीकृत इकाइयों का प्रचार-प्रसार पर्यटन विभाग अपनी आधिकारिक वेबसाइट और ब्रोशर्स के माध्यम से वैश्विक स्तर पर स्वयं करेगा।