160 करोड़ घोटाले में गिरी गाज: कालका नगर परिषद का ईओ गिरफ्तार

160 करोड़ घोटाले में गिरी गाज: कालका नगर परिषद का ईओ गिरफ्तार

The Axe Falls in ₹160 Crore Scam

The Axe Falls in ₹160 Crore Scam

आरोपी ने कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजर से मिल कर रचा फर्जीवाड़े का षडयंत्र
पंचकूला नगर निगम में सीनियर अकाउंट अफसर रहते कमिश्नर, अकाउंटेंट के फर्जी हस्ताक्षरों से घुमाया धन, बिल्डरों तक पहुंचा

अर्थ प्रकाश आदित्य शर्मा
पंचकूला। The Axe Falls in ₹160 Crore Scam: 
नगर निगम में हुए 160 करोड़ रूपए के एफडी घोटाले की गाज कालका नगर परिषद के कार्यकाारी अधिकारी (ईओ) विकास कौशिक पर गिरी है। विजिलेंस की रडार पर 7 दिन पहले आए कौशिक से पूछताछ में हुए खुलासे में पंचकूला नगर निगम में सीनियर अकाउंट अफसर रहते उन पर कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर कर खाता खुलवाने के आरोप सामने आए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला में आरोपी विकास कौशिक को विधी अनुसार गिरफ्तार किया गया। विजिलेंस की पड़ताल में सामने आया कि जब आरोपी विकास कौशिक नगर निगम में बतौर सैक्शन आफिसर तैनात था तो उसी दौरान आरोपी व कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजर पुष्पेन्द्र ने मई 2020 में नगर निगम का एक फर्जी बैंक खाता खोला, जिसके बैंक अकाउंट ओपनिंग फार्म पर आरोपी विकास कौशिक ने कमिश्नर नगर निगम व सिनियर अकाउंट आफिसर की मुहरें लगा दी। फिर आरोपियों ने उन मुहरों पर तत्कालिन आयुक्त सुमिधा कटारिया, आई.ए.एस व तत्कालिन सिनियर अकाउंट आफिसर सुशील कुमार के जाली हस्ताक्षर कर दिए। जिसके बाद आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र ने मिलकर जून 2022 में नगर निगम पंचकुला के नाम एक और जाली खाता कोटक महिंद्रा बैंक पंचकूला सेक्टर 11 में खुलवाया। उसके अकाउंट ओपनिंग फार्म पर बतौर सिनियर अकाउंट आफिसर आरोपी विकास कौशिक ने अपने हस्ताक्षर किए तथा दूसरे सिग्नेटरी डी.एम.सी नगर निगम की जाली मोहर लगा दी। इस मुहर पर तत्कालिन डी.एम.सी. दीपक सुरा के हस्ताक्षर के भी आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र मैनेजर हस्ताक्षर किए।

पड़ताल में यह पता चला कि आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र नगर निगम के फर्जी डेबिट पत्र (आर.टी.जी. एस/एन.ई.एफ.टी. नोट) बनाने के बाद फर्जी डेबिट नोट (आर.टी.जी.एस / एन.ई.एफ.टी. नोट) पर एक सिग्नेटरी के रूप में आरोपी विकास कौशिक अपने हस्ताक्षर कर देता था। दूसरे सिग्नेटरी के हस्ताक्षर जाली कर देते थे। फर्जी बैंक खातों से इन डेबिट पत्रों के माध्यम से पुष्पेन्द्र अपने अन्य बैंक खातों में नगर निगम के रूपये स्थांनातरित कर लेता था। आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र कोटेक महेन्द्रा मैनेजर द्वारा फर्जी डेबिट पत्र (आर.टी.जी.एस/एन.ई.एफ. टी. नोट) से नगर निगम के असल खातों में जो एफ.डी. बनी होती थी, उनको प्री मैच्योर तुड़वाकर उसकी राशि को फर्जी हस्ताक्षर करके नगर निगम निगम के नाम से खोले दो फर्जी खातों में ट्रांसफर करके फिर दोनों खातों से आगे रजत ढाहरा, स्वाति तोमर व अन्य के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। फिर पुष्पेन्द्र और आरोपी विकास कौशिक उनको आगे बिल्डरों को वह रूपये ट्रांसफर कर देते थे।
ऐसे हुआ षडयंत्र का खुलासा
जब जुलाई 2025 तथा फरवरी 2026 में जब नगर निगम ने एफ.डी. बारे तथा खातों में जमा राशि बारे सूचना मांगी तब दलीप राघव आर.एम. कोटेक महेन्द्र बैंक सेक्टर-11 ने आरोपी विकास कौशिक से काल करके विचार-विमर्श किया था, क्योंकि आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र मैनेजर ने सभी एफ.डीओं को प्री मैच्योर तुड़वा दिया था और उनकी राशि को आगे ट्रांसफर कर दिया था। कोई एफ.डी. या राशि खातों में नहीं थी। जिस पर आरोपी विकास कौशिक ने दलीप राघव को पुष्पेन्द्र से बात करने तथा मेल पर मांगी गई सूचना को झूठे कन्फर्म करने बारे कहा था और फर्जी स्टेटमैन्ट बनाकर तथा फर्जी एफ.डी. एडवाइस बनाकर नगर निगम पंचकूला को भेज दिया था।