अलीगढ़: सुजाता राघव की ‘श्री शुभांग’ से महिला सशक्तिकरण की मिसाल

अलीगढ़: सुजाता राघव की ‘श्री शुभांग’ से महिला सशक्तिकरण की मिसाल

Sujata Raghav Sets an Example of Women Empowerment

Sujata Raghav Sets an Example of Women's Empowerment

लखनऊ। अलीगढ़ के हरदुआगंज क्षेत्र के गांव उखलाना की सुजाता राघव ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो विपरीत परिस्थितियाँ भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। कोरोना काल में जब उनके पति की नौकरी छूट गई और परिवार पर आर्थिक संकट के बादल छा गए, तब सुजाता ने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भरता का कठिन रास्ता चुना। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से मिली प्रेरणा ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।

एनआरएलएम का सहारा और व्यवसाय की शुरुआत

सुजाता को अपने व्यवसाय को खड़ा करने में एनआरएलएम के जरिए जरूरी आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिला। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिली शुरुआती पूंजी से उन्होंने पूजा सामग्री के निर्माण की नींव रखी। इस वित्तीय मदद ने न केवल उनके व्यापार को मजबूती दी, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे विस्तार करने और अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़ने का अवसर भी प्रदान किया।

'श्री शुभांग' ब्रांड: अलीगढ़ से राष्ट्रीय मंच तक

वर्ष 2022 में सुजाता ने “श्री राघव ग्रामीण महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन किया। शुरुआत सूती बातियों से हुई, लेकिन आज उनका ब्रांड ‘श्री शुभांग’ धूपबत्ती, हवन सामग्री और विशेष पूजा किट्स जैसे विविध उत्पादों के लिए जाना जाता है। सुजाता ने अपने उत्पादों का ट्रेडमार्क पंजीकृत कराया और अमेज़न, फ्लिपकार्ट व जियो मार्ट जैसे ई-कॉमर्स दिग्गजों के साथ हाथ मिलाया। वर्तमान में उनके ब्रांड की सालाना बिक्री 2 से 2.50 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

डिजिटल तकनीक से मिली वैश्विक पहचान

सुजाता की सफलता में डिजिटल साक्षरता का बड़ा योगदान है। ओएनडीसी (ONDC) प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद उनका कारोबार अलीगढ़ की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गया है। शुरू में चुनौतीपूर्ण लगने वाली डिजिटल तकनीक को उन्होंने परिवार और एनआरएलएम टीम के सहयोग से सीखा। आज वह मोबाइल के जरिए इन्वेंटरी मैनेज करती हैं और देश के किसी भी कोने से ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं।

महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

आज सुजाता न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि उनके समूह से 10 महिलाओं को सीधा और 10 अन्य को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। समूह से जुड़ी महिलाएं 7 से 8 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं और समूह की कुल मासिक आय डेढ़ लाख रुपये के करीब है। सुजाता का मानना है कि जब एक महिला मजबूत होती है, तो पूरा समाज मजबूत होता है। उनकी यह यात्रा आत्मविश्वास और सामूहिक प्रयास की एक जीवंत मिसाल है।