हरियाणा के राज्यपाल के रूप में एक वर्ष का सफल सफर
हरियाणा के राज्यपाल के रूप में एक वर्ष का सफल सफर

हरियाणा के राज्यपाल के रूप में एक वर्ष का सफल सफर

हरियाणा के राज्यपाल के रूप में एक वर्ष का सफल सफर

हरियाणा प्रदेश के बारे में सुना था देशोस्ति हरणाख्यः, पृथ्व्यिां स्वर्गसन्निभः यानि हरियाणा धरती पर एक ऐसा देश (राज्य) है जो स्वर्ग के समान है। जब मैंने हिमाचल प्रदेश से 15 जुलाई 2021 को हरियाणा के 18वें राज्यपाल के रूप में पद ग्रहण किया तो कुछ दिनों के बाद ही महसूस होने लगा कि वास्तव में हरियाणा प्रदेश स्वर्ग के समान है। यहां की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर जहां सिन्धु घाटी की सभ्यता को बयां करती है वहीं कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के उपदेश की गवाह रही है। 
समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ हरियाणा भौगोलिक दृृष्टि से अपनी पहचान कायम किए हुए है। आज मुझे राज्य में राज्यपाल का पदभार संभाले एक वर्ष हो चुका है। लगभग दो वर्षो तक हिमाचल प्रदेश की देव भूमि में राज्यपाल के रूप में लोगों की सेवा करने के बाद वीर भूमि हरियाणा में सेवा करने का मौका मिला जहां एक वर्ष में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सभी वर्गों के लोगों से मिला और एक मुख्य बात जो मेरे जहन में हर दिन ताजा रहती है वो यह है कि यहां के लोग ‘‘सादा जीवन उच्च विचार‘‘ में विश्वास रखने वाले हैं। भौतिकवाद के चलते आज भी हरियाणा निवासी इसी सिद्धान्त को अपनाए हुए हैं। यही शैली और व्यवहार हरियाणा की एक अलग पहचान है।
भौगोलिक दृष्टि से हरियाणा की सीमाएं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तीन ओर से सटी हुई हैं, लेकिन प्रदेश में लोग अभी भी अपनी ग्रामीण विरासत को बनाए हुए हैं। यहां के लोग अब पूरी तरह प्रोफैशनल तो हो गए है लेकिन पूरी तरह व्यवहारिक हैं। बेबाकी और स्पष्टता के धनी लोगों की एक अपनी पहचान है, जिससे अन्य राज्यों के लोग इन्हें सीधे-साधे समझते हैं। 
1966 में पंजाब से अलग होने बाद अपने 56 साल के सफर में प्रदेश ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है। सैन्य, खेल, कृषि व ऑटो उत्पादन के क्षेत्र में तो बड़े बड़े राज्यों को पछाड़ कर अग्रिम स्थान बनाया है। इसका श्रेय यहां कि सरकार, राजनितिक व जनता में साम्प्रदायिक सद्भाव को जाता है। सभी राजनितिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हरियाणा के विकास और हितों की बात करते है। विधान सभा व जनसभा में बहस भी प्रदेश के हित में होती हैं। यहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भी साम्प्रदायिक सोहार्द के साथ प्रदेश के विकास में एक मिसाल कायम की है।
खेल और सैन्य क्षेत्र तो आज प्रदेश के पर्याय बन चुके हैं। खेलों में ऑलम्पिक, एशियाड, राष्ट्रमंडल हो या राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट हो यहां के युवाओं ने देश की झोली को पदकों से भरा है। सैन्य क्षेत्र में हर दसवां जवान हरियाणा से हैं इसलिए यह प्रदेश वीर भूमि के रूप में पहचाना जाता है। 
देश में आज आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। हरियाणा में भी इन महोत्सवों के दौरान महान स्वतंत्रता सेनानी राव तुला राम, पंडित नेकी राम शर्मा व अन्य सेनानियों को गरिवापूर्ण तरीके से याद किया जा रहा है। मैंने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों अम्बाला, पानीपत, कुरूक्षेत्र, नूंह, पलवल, जींद, हिसार, सिरसा व विभिन्न स्थानों का दौरा किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित आजादी के अमृत महोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेकर मैंने पाया कि यहां के लोगों में देश प्रेम व राष्ट्र भक्ति का जज्बा हर भारतीय के लिए एक नजीर है।
हरियाणा आज भी अपनी कृषि विरासत को सहेजे हुए है जिस कारण कृषि उत्पादन में हरियाणा अग्रणी है। हरियाणा में एक कहावत मशहूर है कि देसां मैं देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणां। आज प्रदेश दूध के उत्पादन में देश का दूसरा राज्य है। प्रदेश के लोगों ने विभिन्न विकसित तकनीकों को अपनाते हुए प्राकृतिक खेती पर ध्यान आकर्षित किया, जिससे गुणवत्ता का फसल उत्पादन कर निर्यात किया जा रहा है। 
मैंने पिछले एक वर्ष में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में दौरा कर सामाजिक कार्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह व अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हर वर्ग के लोगों से मिलने का अवसर मिला और लोगों के रहन-सहन व सुविधाओं तथा समस्याओं के बारे में जाना। विश्वविद्यालयों में विश्व स्तरीय शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित हो चुकी है। विश्वविद्यालयों ने एनईपी-2020 की शुरूआत कर दी है।
पिछले एक वर्ष के कार्यकाल में मैंने मुख्यमंत्री के साथ कई बैठकें की हैं, जिससे हर मामले में बेहतर समन्वय कायम हुआ है। यहां तक कि एक बार एक मामले में सरकार अध्यादेश लाना चाहती थी लेकिन मेरे सुझाव देने पर इसी मामले पर विधान सभा में बिल पेश किया गया, जिससे विधायी मामलों में तालमेल स्थापित हुआ है। सभी मंत्रियों व राजनीतिक दलों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अधिकारियों व पत्रकारों के साथ बातचीत की और प्रदेश के हित में सुझाव सामने आए जिससे मुझे धरातल की समस्याओं का पता चला और समय-समय पर सरकार के ध्यान में लाने का काम किया। 
राजभवन के अन्तर्गत कार्य कर रही संस्थाओं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद, रेडक्रॉस सोसाइटी हरियाणा, सैंट जान एम्बूलैंस, वाणी एवं श्रवण निशक्त जन कल्याण जैसी संस्थाओं के कार्यों की समीक्षा कर और कार्य में और गति लाने का प्रयास किया। इसमें मुख्यमंत्री हरियाणा का सहयोग भी बेहद रचनात्मक रहा है। वाणी एवं श्रवण निशक्त जन कल्याण संस्था के तीन बच्चों व राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर देश का नाम रोशन किया। कोविड-19 के दौरान किए गए कार्यों के लिए सरहनीय कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया।  
हरियाणा की संस्कृति पर गीता के साथ-साथ सिक्ख गुरूओं का भी प्रभाव रहा है। यह प्रभाव ही प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को महान बनाता है। कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर गीता प्रचार के कार्यक्रम को गति देने का कार्य किया। मैंने हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को जानने के लिए सरस्वती उद्गम स्थल आदि बद्री का दौरा किया। इसके साथ पर्यावरण और आद्र भूमि के संरक्षण के लिए सुलतानपुर झील का दौरा कर लोगों से सुझाव मागें। पिछले एक वर्ष में राजभवन में हरियाणा की संस्कृति, सभ्यता व विभिन्न गतिविधियों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से तीज उत्सव, होली मिलन समारोह, हरियाणा दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व विजय दिवस का आयोजन किया गया, जो प्रदेश के लोगों को हरियाणा से रू-ब-रू करवाने का एक सार्थक प्रयास रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में विकास की बढ़ती गति को मद्देनजर देखते हुए इस वर्ष के लिए पौने दो लाख करोड़ से भी अधिक की राशि का प्रावधान किया है जो प्रदेश में प्रगति को नए आयाम देगा। इस प्रकार से राज्यपाल के रूप में मेरा एक वर्ष का कार्यकाल बहुत ही सुखद अनुभव लिए हुए रहा है।