शिमला: 20 मार्च को तय होगी संपत्ति कर में बढ़ोतरी; जीडीपी (GDP) बनेगा आधार
Shimla: Property Tax Hike to be Decided on March 20
शिमला। राजधानी शिमला में संपत्ति कर में बढ़ोतरी की दर के लिए नगर निगम प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। शिमला में संपत्ति कर में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका फैसला 20 मार्च को तय किया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से बजट सत्र के दौरान आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा और इसके आधार पर हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आंकड़ा सामने आएगा। इसी जीडीपी के आधार पर नगर निगम शिमला में संपत्ति कर की दरों में बढ़ोतरी की प्रतिशतता तय की जाएगी।
केंद्र सरकार के नियमों के तहत स्थानीय निकायों को आय बढ़ाने के लिए हर साल संपत्ति कर में संशोधन करना होता है। इसी प्रक्रिया के तहत शिमला में भी कर की दर में बढ़ोतरी की जानी है।
आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की संभावना
राज्य सरकार की ओर से 20 मार्च को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की संभावना है। इस सर्वेक्षण में पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति और जीडीपी की वृद्धि दर का पूरा ब्योरा होगा। जीडीपी में जितनी बढ़ोतरी होगी, उसी अनुपात में नगर निगम संपत्ति कर में बढ़ोतरी कर सकता है।
अभी 22 करोड़ की आय
अभी नगर निगम संपत्ति कर से लगभग 22 करोड़ रुपये की आय कर रहा है। केंद्र सरकार ने देश के सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए यह नियम लागू किया है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए संपत्ति कर में नियमित बढ़ोतरी करें।
केंद्र की कई योजनाओं और परियोजनाओं के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता भी इसी शर्त से जुड़ी होती है। नगर निगम अपनी आय बढ़ाने के लिए संपत्ति कर में संशोधन नहीं करता है तो उसे केंद्र सरकार की कुछ योजनाओं के तहत मिलने वाली फंडिंग में भी परेशानी आ सकती है।
संपत्ति कर आय का महत्वपूर्ण स्रोत
नगर निगम शिमला के अधिकारियों का कहना है कि अब संपत्ति कर में हर साल बढ़ोतरी की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य नगर निगम की आय बढ़ाना और शहर में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना है। नगर निगम शिमला को शहर में सड़कों की मरम्मत, सफाई व्यवस्था, पानी की आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर काफी राशि खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में संपत्ति कर नगर निगम के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।