यौन उत्पीड़न मामला: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ ‘ रैप की कोशिश’ की धारा जोड़ने की मांग खारिज
- By Gaurav --
- Monday, 11 May, 2026
Sexual Harassment Case: Demand
हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह को बड़ी राहत मिली है। जिला अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों में संशोधन कर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 ( रैप का प्रयास) को धारा 511 के साथ जोड़ने और मामले को सत्र अदालत में विचारण के लिए भेजने की मांग को खारिज कर दिया। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की अर्जी खारिज कर दी। अदालत में संदीप सिंह की ओर से बचाव पक्ष ने जवाब दाखिल कर विरोध किया था। अभियोजन पक्ष की अर्जी पर बहस भी हुई थी। अदालत के निर्णय से अब केस का ट्रायल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में ही चलेगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई तय की गई है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अर्जी पर निर्णय लिया। वहीं, अभियोजन पक्ष ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में यह अर्जी दायर की थी। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, जिसमें पीड़िता का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत बयान और अदालत में दिया गया मुख्य परीक्षण शामिल है, आरोपी के खिलाफ स्पष्ट, सुसंगत और गंभीर आरोप दर्शाते हैं।
वहीं, संदीप सिंह की ओर से बचाव पक्ष के वकील ने इस अर्जी का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी करने की रणनीति बताया और कहा कि पूर्व ओलंपियन को झूठा फंसाया गया है। उनका कहना है कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहपठित धारा 511 के तहत अपराध बनता है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता ने अपनी प्रारंभिक पुलिस शिकायत, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी, में इस तरह के आरोपों का उल्लेख नहीं किया था।
वकील ने आगे कहा कि इसी तरह की एक अर्जी शिकायतकर्ता द्वारा पहले भी दायर की गई थी, जिसे 29 जुलाई 2024 को पूर्ववर्ती अदालत ने खारिज कर दिया था। इस आदेश को न तो शिकायतकर्ता और न ही राज्य ने सत्र अदालत में चुनौती दी, जिससे यह अंतिम रूप ले चुका है।
पुलिस ने 31 दिसंबर 2022 को एक पूर्व कोच की शिकायत पर पूर्व मंत्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 354, 354-ए, 354-बी, 342, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था।
चंडीगढ़ पुलिस को दिए अपने बयान में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 1 जुलाई 2022 को मंत्री ने अपने सरकारी आवास पर उसके साथ छेड़छाड़ की, विरोध करने पर उसे धक्का दिया और उसकी टी-शर्ट फाड़ दी, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से बचकर निकलने में सफल रही।
अभियोजन पक्ष की मांग: अभियोजन पक्ष ने अदालत से आग्रह किया था कि मामले में ‘rape की कोशिश’ की धारा जोड़ी जाए और इसे सत्र न्यायालय में विचारण के लिए भेजा जाए। इस संबंध में दो अलग-अलग अर्जियां दायर की गई थीं। अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप तय में संशोधन की मांग के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 376/511 जोड़ने की बात कही गई थी।
मुख्य परीक्षण में पीड़िता अपने बयान पर कायम रही थी। माना गया कि इसी आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोप तय में संशोधन की अर्जी दायर की।
कोच का आरोप है कि मंत्री ने उन्हें अपने सरकारी आवास पर बुलाकर अनुचित व्यवहार किया। वहीं, संदीप सिंह ने शुरू से ही आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्थानांतरण से नाराज होकर उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया।
प्राथमिकी में गलत तरीके से रोकने, छेड़छाड़, कपड़े फाड़ने, आपराधिक धमकी देने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। इनमें से कुछ धाराएं जमानती हैं, जबकि धारा 354 और 354-बी गैर-जमानती श्रेणी में आती हैं।
पीड़िता की अर्जी पर मामला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।