हिमाचल की पंचायतों में ऑडिट में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
Serious Irregularities Uncovered
शिमला। Serious Irregularities Uncovered, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान हिमाचल प्रदेश की पंचायतों के वार्षिक अंकेक्षण यानी आडिट एवं निरीक्षण प्रतिवेदन में गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। राज्य लेखा परीक्षा विभाग द्वारा अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक कुल 346 पंचायतों का ऑडिट किया गया, जिसमें करोड़ों रुपये की बकाया वसूली, अनियमित व्यय और नियमों की अनदेखी का पता चला है। यह रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शनिवार का पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रस्तुत की।
इस ऑडिट में सबसे गंभीर मामला 15.82 करोड़ रुपये के अनियमित व्यय का है, जहां बिना बिल और बाउचर के भुगतान किए गए। इसके अलावा, खनन सामग्री की आपूर्ति पर 14.50 करोड़ रुपये की रायल्टी नहीं काटी गई, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
राजस्व वसूली में भारी लापरवाही
आडिट रिपोर्ट के अनुसार, पंचायतों द्वारा अपने स्रोतों से प्राप्त राजस्व की वसूली में भारी लापरवाही बरती गई है। 31 मार्च 2025 तक 3.40 करोड़ रुपये की राशि गृहकर, दुकानों के किराये और मोबाइल टावर शुल्क के रूप में वसूले नहीं गए। विभाग ने इस राशि की शीघ्र वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रोकड़ बही और बैंक खातों में भी अंतर
इसके अतिरिक्त, पंचायतों की रोकड़ बही और बैंक खातों में 695.41 लाख रुपये का अंतर पाया गया, जो वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विभिन्न योजनाओं के तहत प्राप्त 92.23 करोड़ रुपये की अनुदान राशि खर्च नहीं की गई। कई मामलों में अनुदान की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद राशि का उपयोग नहीं किया गया, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
22.39 करोड़ रुपये के कार्यों के अभिलेख प्रस्तुत नहीं
जीएसटी और टीडीएस के रूप में 7.03 करोड़ रुपये की कटौती नहीं करना भी एक बड़ी अनियमितता के रूप में सामने आया है। आडिट के दौरान 22.39 करोड़ रुपये के कार्यों से संबंधित माप पुस्तिकाएं और अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।