लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, पेपर लीक और छात्रा से अभद्र बातचीत मामले में बड़े खुलासे

लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, पेपर लीक और छात्रा से अभद्र बातचीत मामले में बड़े खुलासे

1000220898

Serious allegations against a professor at Lucknow University

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. परमजीत सिंह पर लगे पेपर आउट कराने और छात्रा से अशोभनीय बातचीत के आरोपों में पुलिस जांच के दौरान कई खुलासे हुए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपित प्रोफेसर पिछले डेढ़ वर्ष से छात्रा के संपर्क में आने की कोशिश कर रहा था।

यह भी जानकारी मिली है कि वह एक अन्य छात्रा को इसी तरह प्रश्न पत्र का प्रलोभन देने का प्रयास कर रहा था। वहीं इस मामले में विश्वविद्यालय द्वारा गठित आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) ने शनिवार को दोनों पक्षों के बयान और तथ्यों के आधार पर जांच पूरी कर ली।

महानगर एसीपी अंकित सिंह का कहना है कि पूछताछ में डा. परमजीत सिंह ने आडियो में अपनी आवाज होने की बात स्वीकार कर ली है। लड़की ने जो लिखित बयान दिया है उसके अनुसार डा. परमजीत ने पिछले वर्ष भी छात्रा से संपर्क साधने का प्रयास किया था। उस समय उन्होंने पेपर में मदद और अच्छे नंबर दिलाने का झांसा देकर बातचीत बढ़ाने की कोशिश की थी।

सही नहीं लगी प्रोफेसर की मंशा 

प्रोफेसर की मंशा सही नहीं लगी तो उसने बातचीत बंद कर दी। इसके बावजूद आरोपित लगातार संपर्क बनाने का प्रयास करता रहा। इस वर्ष परीक्षा के दौरान उसने फिर छात्रा पर दबाव बनाना शुरू किया। आरोप है कि प्रोफेसर ने छात्रा से कहा कि उसने उसके लिए कोर और इलेक्टिव दोनों पेपर आउट करा दिए हैं और मिलने के लिए दबाव बनाया। लगातार मानसिक दबाव और बातचीत से परेशान होकर छात्रा ने प्रोफेसर के आडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिए।

वायरल आडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्राक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आरोपित शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने देर रात ही आरोपित प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पेपर आउट कराने की बात स्वीकार करना भी परीक्षा गोपनीयता भंग करने और पेपर लीक की श्रेणी में माना जा ता है।

पुलिस ने अपनी रिपोर्ट की तैयार

इसी आधार पर पुलिस ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इंस्पेक्टर हसनगंज चितवन कुमार के मुताबिक आरोपित का मोबाइल फोन और लैपटाप जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं उसने अन्य छात्राओं को भी इसी तरह का प्रलोभन तो नहीं दिया था। उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी के निर्देश पर गठित आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) ने शनिवार को दोनों पक्षों के बयान और तथ्यों के आधार पर जांच पूरी कर ली।

समिति अपनी रिपोर्ट सोमवार को कार्य परिषद की बैठक में सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इंटरनेट मीडिया पर भी छात्रों और पूर्व छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय को ऐसा कड़ा कदम उठाना चाहिए जिससे भविष्य में कोई शिक्षक अपनी स्थिति का दुरुपयोग करने का साहस न कर सके।

पहले भी हो चुके हैं कई मामले

विश्वविद्यालय में पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2019 में विधि संकाय का प्रश्नपत्र आउट होने का मामला सामने आया था। उस समय जांच की जिम्मेदारी एसटीएफ को सौंपी गई थी। जांच के बाद आरोपित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में अदालत से राहत मिलने पर उन्हें बहाल कर दिया गया था। उस प्रकरण ने भी विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और गोपनीय प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए थे।

इसके अलावा वर्ष 1997 में एआइएच विभाग के एक शिक्षक के खिलाफ एक छात्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था, हालांकि पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो सके थे। इसी तरह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग के दो शिक्षकों पर भी शिकायतें दर्ज हुई थीं। मामला विश्वविद्यालय की विशाखा समिति तक पहुंचा, लेकिन जांच में आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए।

वर्ष 2022-23 में डा. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध कुछ कालेजों में नंबर बढ़ाने और बैक पेपर क्लियर कराने के नाम पर छात्राओं से अश्लील चैट और अनैतिक मांग करने के मामले सामने आए थे। इसमें कुछ बाहरी दलालों और कालेज स्टाफ की मिलीभगत पाई गई थी, जिसके बाद एसटीएफ ने जांच की थी। विश्वविद्यालय में पहले भी विधि विभाग और अन्य विभागों के कुछ प्रोफेसरों पर आंतरिक शिकायत समिति में छात्राओं द्वारा दुर्व्यवहार और नंबर कम देने की धमकी देकर दबाव बनाने की शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।