शिमला में वकीलों का बड़ा 'एक्शन': सील्ड रोड विवाद पर सचिवालय घेरा, मंत्री की गाड़ी का पुलिस से कटवाया ₹1500 का चालान

शिमला में वकीलों का बड़ा 'एक्शन': सील्ड रोड विवाद पर सचिवालय घेरा, मंत्री की गाड़ी का पुलिस से कटवाया ₹1500 का चालान

Secretariat Gheraoed Over Sealed Roads Dispute

 शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने छोटा शिमला से हाई कोर्ट सील्ड सड़क पर अपने वाहनों की आवाजाही पर लगाई जा रही रोक का विरोध जताया है। इसके विरोध में अधिवक्ताओं ने पहले मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर के बाहर प्रदर्शन किया और वहां से सचिवालय मार्च किया और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।

इस दौरान सील्ड रोड पर लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह की गाड़ी आ रही थी, अधिवक्ताओं ने पुलिस को दबाव बनाकर नियमों के तहत उसका 1500 रुपये का चालान करवाया। हालांकि मंत्री गाड़ी में नहीं थे। गाड़ी में उनकी माता पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सवार थीं।

रास्ते में रोकी जा रही गाड़ियां

अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस उनकी गाड़ियों को रास्ते में रोक रही है, जिससे उन्हें समय पर अदालत पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वकीलों ने सचिवालय के बाहर नारेबाजी की और सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को मिलने बाहर बुलाने पर अड़ गए।

क्या कहते हैं अधिवक्ता

अधिवक्ता एचएस ठाकुर ने कहा कि वर्षों से छोटा शिमला सचिवालय मार्ग से हाई कोर्ट तक अधिवक्ताओं की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होती रही है। लेकिन अब पुलिस द्वारा वाहनों को रोका जा रहा है और उन्हें कार्ट रोड से जाने के लिए कहा जा रहा है।

कार्ट रोड से आने का विरोध

उन्होंने कहा कि कार्ट रोड पर भारी ट्रैफिक जाम रहता है, जिस कारण अधिवक्ता समय पर अदालत नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है और न्याय प्रशासन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि वे सुबह अदालत जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं, इसलिए उनकी आवाजाही से किसी प्रकार की अव्यवस्था पैदा नहीं होती। उनका आग्रह है कि पहले से चली आ रही व्यवस्था को यथावत रखा जाए।

वकीलों ने बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई लिखित आदेश जारी किए गए हैं या नहीं, लेकिन पुलिस द्वारा लगातार वाहनों को रोका जा रहा है।

सीएम से बात करेंगे अधिवक्ता

अधिवक्ता एचएस ठाकुर ने कहा कि इस मामले को लेकर वे मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं भी अधिवक्ता रहे हैं और वकीलों की समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।