सरकाघाट अग्निकांड: 'देवभूमि' में पसरा सन्नाटा, मासूम सिया की हत्या ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
Sarkaghat Fire Tragedy: Silence Descends upon the 'Land of Gods
सरकाघाट (मंडी)। Sarkaghat Fire Tragedy: Silence Descends upon the 'Land of Gods, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में कॉलेज जाती छात्रा की निर्मम हत्या के बाद हर कोई मायूस है। सरकाघाट की शांत वादियों में चार दिन से पसरी एक चीख अब हर दिल को चीर रही है। सिया की माता और पिता जोगेंद्र की आंखों में सूख चुके आंसू और टूट चुकी आवाज एक ऐसे दर्द की गवाही दे रहे हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
सिया के माता और पिता बार-बार एक ही सवाल दोहरा रहे हैं, मेरी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उनके हाथों में सिया की तस्वीर है, जिसे वह कभी सीने से लगाते हैं तो कभी आसमान की ओर देख सवाल करते हैं। उनके शब्दों में सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि एक बाप की बेबसी भी साफ झलकती है।
इंसाफ नहीं, जवाब चाहिए कि आखिर क्यों
जोगेंद्र गुलेरिया कहते हैं कि मुझे इंसाफ नहीं, जवाब चाहिए… आखिर क्यों? यह सवाल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि हर उस इंसान का है जो इस दर्दनाक घटना को सुन रहा है।
घर की रौनक आज सन्नाटा छोड़ गई
सिया, जो कभी घर की रौनक थी, आज उसी घर में सन्नाटा छोड़ गई है। मां की आंखें दरवाजे पर टिकी हैं, मानो अभी सिया अंदर आएगी और कहेगी, मां, मैं आ गई। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा क्रूर है।
लोगों के दिलों में डर और गुस्सा
बताया जा रहा है कि सिया पर दराट से कई वार किए गए, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इस निर्ममता ने लोगों के दिलों में डर और गुस्सा दोनों भर दिया है। गांव के लोग भी इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं और आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सिया चली गई पर छोड़ गई अनगिनत सवाल
देवभूमि कहलाने वाला हिमाचल आज इस वारदात से शर्मसार है। सिया तो चली गई, लेकिन अपने पीछे अनगिनत सवाल छोड़ गई है। क्या उसकी चीख किसी ने नहीं सुनी? क्या उसकी जिंदगी इतनी सस्ती थी? अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर टिकी हैं कि क्या सिया को न्याय मिलेगा और उसके पिता को उनके सवालों का जवाब।