उत्तर प्रदेश में निषाद समाज की बढ़ती सियासी अहमियत, दलों में बढ़ी सक्रियता
Rising Political Significance of the Nishad Community in Uttar Pradesh
लखनऊ: Rising Political Significance of the Nishad Community in Uttar Pradesh, उत्तर प्रदेश में यकायक निषाद समाज से आने वाले नेता चर्चा का मुद्दा बन गए हैं सबसे पहले भाजपा ने साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनाया. इसके बाद निषाद पार्टी के मुखिया उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद उत्तर प्रदेश में रोते दिखाई दिए और अब समाजवादी पार्टी ने फूलन देवी की बहन रुक्मणी देवी को समाजवादी पार्टी के महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.
समाजवादी पार्टी ने 67 साल की रुक्मिणी देवी को पद दिया है यह कोई रूटीन में दिया जाने वाला पद नहीं है बल्कि समाजवादी पार्टी की पीडीए स्ट्रेटजी का महत्वपूर्ण पद मान जा रहा है. रुक्मिणी देवी से निषाद समाज को संदेश देने की कोशिश ही है. दरअसल निषाद मल्लाह कम्युनिटी उत्तर प्रदेश की बड़ी पिछड़ी जात है जिनका प्रभाव पूर्वांचल और अवध क्षेत्र से लेकर बुंदेलखंड तक है 2027 चुनाव के लिए यह महत्वपूर्ण प्रयास है. रुक्मिणी देवी का कहना है कि सभी को अखिलेश में भरोसा है. संजय निषाद पर आक्रामक रुक्मणी कहती है इन्होंने दुकान बना रखी है फूलन देवी के नाम पर लोगों को उल्लू बनाया है. सवाल कर रही है कि सरकार में रहकर संजय निषाद ने क्या किया है.
निषाद समाज को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जानकार योगेश मिश्रा का कहना है निषाद समाज का कोई एक नेता नहीं हो सकता. उनके तीन बेल्ट हैं, उत्तर प्रदेश में जिसमें बनारस से लेकर गोरखपुर तक है दूसरी बनारस से कानपुर तक और तीसरी बुंदेलखंड में है. मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी से प्रयास किया पर वह भी सफल नहीं हो पाई. भाजपा ने निरंजन ज्योति को पद दिया है पर संजय निषाद से समझौता भी है संजय निषाद गोरखपुर से लेकर अंबेडकर नगर तक के ही नेता है केवल.
उत्तर प्रदेश के कुल वोटरों का 4.5% निषाद वोटर है. कुल विधानसभा की 80 विधानसभा ऐसी है जहां पर निषाद वोटरों की तादाद एक लाख के करीब पहुंच जाती है. 160 से अधिक विधानसभा सीटों पर प्रभाव यह समाज रखता है इस समाज की छोटी जातियां कई बार खुद को निषाद समाज से अलग भी गिनती हैं सभी को अगर एक साथ जोड़ दिया जाए तो यह आबादी 9% के आसपास भी पहुंच जाती है जिला वार अगर बात की जाए तो गोरखपुर,बनारस, आजमगढ़,बलिया, मऊ, गाजीपुर,मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर, जिलों में इनकी आबादी काफी ज्यादा है.