लखनऊ में ‘स्मृति नाद’ का लोकार्पण, राजनाथ सिंह ने साझा किए विचार
Rajnath Singh Shares His Thoughts
रक्षा मंत्री बोले- प्रधानमंत्री मोदी के संवेदनशील व्यक्तित्व का भी परिचय कराती है स्मृति नाद
राजनाथ सिंह बोले, स्वार्थ के कारण पीएम को लेकर फैलाई गई थी तरह-तरह की भ्रांतियां
पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन की पुस्तक का अवधेशानंद गिरि ने भी किया लोकार्पण
लखनऊ का खानपान व संस्कृति का जीवनभर बने रहे पर्याय, फिजाओं में बिखरीं स्मृतियां
लखनऊ। Rajnath Singh Shares His Thoughts, पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय लालजी टंडन की पुस्तक स्मृति नाद का रविवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अवधेशानंद गिरि ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने लालजी टंडन के साथ ही प्रधानमंत्री के कामों पर प्रकाश डाला।
राजनाथ सिंह ने कहा कि निहित स्वार्थ के कारण देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई गई, उनकी छवि को बिगाड़ने का कुचक्र रचा गया। उन्होंने (मोदी ने) चुनाव ही नहीं जीते, बल्कि लोगों के दिलों को जीतकर सच्चे व जनप्रिय नेता की ख्याति अर्जित किया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के संवेदनशील व्यक्तित्व का परिचय पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन की पुस्तक स्मृति नाद में भी मिलता है, जब गुजरात दंगों के दौरान टंडन के फोन करने पर लखनऊ के मुस्लिम परिवार को कुछ ही घंटे में राहत दिला दिया था। ऐसे संस्मरणों के साथ ही पुस्तक में किस्सों की भरमार है।
लालजी टंडन के 91वीं जयंती पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में रविवार को उनकी पुस्तक स्मृति नाद का लोकार्पण करने के बाद रक्षामंत्री ने कहा कि कई महानुभावों की छाप टंडन पर थी और टंडन की छाप कई लोगों पर थी। टंडन कहते थे कि सेक्युलरिज्म शब्द भारत का नहीं है, धर्म से विमुख नहीं हुआ जा सकता इस शब्द का सही अर्थ सर्व धर्म समभाव है।
रक्षा मंत्री ने फील्ड मार्शल करियप्पा के लखनऊ आने व एयरपोर्ट पर प्लेन हाईजैक सहित कई संस्मरणों का उल्लेख करते हुए टंडन के व्यक्तित्व व कृतित्व को विस्तार से बताते हुए कहा कि टंडन का पूरा जीवन लखनऊ की संस्कृति बढ़ाने व विकास करने में बीता। उन्होंने लखनऊ को अपने भीतर समाहित कर लिया था।
टंडन के उपनाम बाबूजी का मतलब था लखनऊ और चौक का सोंधी टोला। उनके घर के द्वारा सदैव सभी के लिए खुले रहते थे वो सभी की बात सुनते थे वो जितने मिलनसार थे, निर्णय लेने में उतने ही निर्भीक थे।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे जूना पीठाधीश्वर व महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि टंडन कुशल राजनीतिज्ञ के साथ अध्यात्म से भी जुड़े रहे। उन्होंने सफलता और समाधान को कैसे सार्थक बनाया जाए इसकी का यत्न करते रहे। राजनीति में शुचिता रखी और अजातशत्रु यानी किसी को शत्रु न मानने की भावना से ही उत्कर्ष को स्पर्श किया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ की सभ्यता को पुस्तक में सहेजना आसान नहीं है। बाबूजी ने लखनऊ के विकास का जो सपना देखा था। वरिष्ठ साहित्यकार यतींद्र मिश्र ने कहा कि टंडन की पुस्तक समारोह सुमिरन पोथी की तरह है। उन्होंने जो देखा, समझा व महसूस किया उसे अपने को पीछे रखकर उभारा। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व लालजी टंडन की आवक्ष प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ।
समारोह में राज्यसभा सदस्य बृज लाल व संजय सेठ, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक डा. नीरज बोरा, योगेश शुक्ला व ओपी श्रीवास्तव और एमएलसी डा. महेन्द्र कुमार सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, पवन सिंह चौहान व अवनीश कुमार सिंह भी मौजूद थे।