पंजाब में 'चुनावी धमाकों' का खौफनाक इतिहास: 2017 से 2027 तक का सुरक्षा ऑडिट
Punjab's Terrifying History of 'Election Blasts
चंडीगढ़। सीमावर्ती राज्य पंजाब में चुनावी माहौल बनते ही सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ना कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो हर विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ब्लास्ट, ड्रोन गतिविधियां, हथियार बरामदगी और टेरर मॉड्यूल से जुड़े मामलों में अचानक तेजी देखी गई।
2017 और 2022 विधानसभा चुनावों से पहले हुए धमाकों ने पूरे प्रदेश में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया था। अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भी लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है।
पंजाब में 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक चार दिन पहले 31 जनवरी को बठिंडा के मौड़ मंडी में बड़ा कार ब्लास्ट हुआ था। जिस जगह धमाका हुआ वहां अकाली दल-भाजपा गठबंधन की चुनावी रैली चल रही थी।
कितने लोगों की हुई मौत?
इस विस्फोट में तीन बच्चों समेत सात लोगों की मौत हुई थी जबकि कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। चुनावी माहौल के बीच इस धमाके ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी थी।
इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भी पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों के सामने लगातार चुनौतियां बढ़ती रहीं। 23 दिसंबर 2021 को लुधियाना कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आईईडी ब्लास्ट हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए थे।
इसके बाद चुनावी माहौल के दौरान कई टेरर मॉड्यूल पकड़े गए। हथियार, आरडीएक्स और ड्रोन सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हुआ। मई 2022 में मोहाली स्थित पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर आरपीजी हमला हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान पंजाब की सुरक्षा स्थिति की ओर खींच दिया।
चुनाव से पहले धमाकों ने खड़े किए सवाल
अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भी पिछले पांच महीनों में कई धमाकों और विस्फोट की घटनाओं ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। चंडीगढ़ स्थित भाजपा मुख्यालय के पास विस्फोट, अमृतसर के भिंडी सैदां क्षेत्र में ब्लास्ट, राजपुरा रेलवे ट्रैक पर धमाका, जालंधर में भाजपा कार्यालय के बाहर विस्फोट और अमृतसर में सेना कैंप के आसपास संदिग्ध गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर पहुंचा दिया है।
कई मामलों में जांच एजेंसियों ने आईईडी और सीमा पार नेटवर्क का एंगल भी सामने आने की बात कही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की पाकिस्तान से लगती सीमा इसे हमेशा संवेदनशील बनाती है।
पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक भेजने के मामलों में तेजी आई है। इसके अलावा विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थक नेटवर्क सोशल मीडिया और लोकल मॉड्यूल के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश करते रहे हैं। यही वजह है कि चुनावी समय के दौरान सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरतती हैं।
पंजाब पुलिस, एएनआईए और केंद्रीय एजेंसियों ने पिछले वर्षों में कई मॉड्यूल का पर्दाफाश करने और बड़ी साजिशों को नाकाम करने का दावा किया है। हालांकि लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
| वर्ष | प्रमुख घटनाएँ / गतिविधियाँ | अनुमानित मामले |
| 2017 | मौड़ मंडी ब्लास्ट, भारी मात्रा में हथियार बरामदगी | करीब 8 |
| 2018 | ग्रेनेड हमले, RDX की बरामदगी और आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ | करीब 12 |
| 2019 | लोकसभा चुनावों के दौरान आतंकी साजिशें और नेटवर्क | करीब 7 |
| 2020 | सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों की अवैध सप्लाई | करीब 5 |
| 2021 | लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट, टारगेट किलिंग की कोशिशें | करीब 9 |
| 2022 | मोहाली में RPG हमला, मॉड्यूल और विस्फोटक बरामदगी | करीब 11-12 |