Punjab Governor Banwari Lal Purohit Resigns News Update

पंजाब के गवर्नर का इस्तीफा; बनवारी लाल पुरोहित ने राष्ट्रपति को लेटर भेजा, जानिए क्यों छोड़ा पद?

Punjab Governor Banwari Lal Purohit Resigns News Update

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Punjab Governor Resigns: पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पुरोहित ने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। बनवारी लाल पुरोहित ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा- " मैं अपने व्यक्तिगत कारणों और कुछ अन्य प्रतिबद्धताओं के कारण, पंजाब के गवर्नर और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार करें। '' ज्ञात रहे कि, पंजाब की भगवंत मान सरकार और बनवारी लाल पुरोहित के बीच गहमागहमी भी लगातार चल रही थी। इसलिए अंदर खाते में यह माना जा रहा है कि, भगवंत मान सरकार से तनातनी के चलते पुरोहित ने इस्तीफा दिया है। हालांकि, पुरोहित ने निजी कारणों की बात कही है तो यह बात स्पष्ट नहीं कह सकते।

बनवारी लाल पुरोहित द्वारा राष्ट्रपति को भेजा गया इस्तीफा पत्र

Punjab Governor Resigns
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अगस्त 2021 में पंजाब के गवर्नर बने थे बनवारी लाल पुरोहित

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने बनवारी लाल पुरोहित को पंजाब का गवर्नर नियुक्त किया था। पुरोहित से पहले वीपी सिंह बदनोर पंजाब गवर्नर थे। वहीं बनवारी लाल पुरोहित ने अगस्त 2021 में पंजाब के 29वें गवर्नर के रूप में शपथ ली थी। तब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा ने पंजाब राजभवन में बनवारी लाल पुरोहित को पद की शपथ दिलाई थी। उस समय पंजाब में काँग्रेस की सरकार थी और कैप्टन अंरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ बनवारी लाल पुरोहित का अच्छा ताल-मेल रहा।

बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब गवर्नर रहते 2 मुख्यमंत्रियों को शपथ दिलाई

बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब गवर्नर पद पर रहते हुए 2 मुख्यमंत्रियों को शपथ दिलाई। दरअसल, कांग्रेस में अंदरूनी उथल-पुथल के बीच कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सितंबर 2021 में पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कैप्टन ने बनवारी लाल पुरोहित को ही अपना इस्तीफा सौंपा था। जिसके बाद कांग्रेस की तरफ से चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा की गई। इसके बाद पुरोहित ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी। वहीं मार्च 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो पुरोहित ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

पंजाब गवर्नर बनने से पहले तमिलनाडू के गवर्नर थे बनवारी लाल पुरोहित

पंजाब गवर्नर बनने से पहले बनवारी लाल पुरोहित तमिलनाडू के 14वें गवर्नर थे। पुरोहित के पास अक्तूबर 2017 से सितंबर 2021 तक तमिलनाडू के गवर्नर का कार्यभार रहा। वहीं इससे पहले बनवारी लाल पुरोहित असम के 25वें गवर्नर रहे। अगस्त 2016 में पुरोहित को असम का गवर्नर नियुक्त किया गया था। सितंबर 2017 तक वह असम गवर्नर का कार्यभार संभालते रहे. इसी बीच पुरोहित को मेघालय के 16वें गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। पुरोहित के पास मेघालय गवर्नर का कार्यभार जनवरी 2017 से अक्तूबर 2017 तक रहा।

3 बार लोकसभा सांसद रहे बनवारी लाल पुरोहित

बनवारी लाल पुरोहित तीन बार लोकसभा सांसद रहे हैं। वह 1984, 1989 और 1996 में तीन बार नागपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 1984 में, वह कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में 8वीं लोकसभा के लिए चुने गए। इसके बाद वह 1989 में कांग्रेस के टिकट पर दोबारा निर्वाचित हुए। इसके बाद वह वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए आंदोलन चलाया और 1991 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। लेकिन वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दत्ता मेघे से हार गए।

मगर 1996 में, वह भाजपा के उम्मीदवार के रूप में 11वीं लोकसभा के लिए चुने गए। वहीं 1999 में, प्रमोद महाजन के साथ गंभीर मतभेद होने के बाद पुरहित ने भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद पुरोहित ने 1999 में रामटेक से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद 2003 में पुरहित ने विदर्भ राज्य पार्टी नाम से अपनी पार्टी बनाई और 2004 में नागपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार गए। इसके बाद में वह फिर से बीजेपी में शामिल हो गए और 2009 में, उन्होंने फिर से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विलास मुत्तेमवार से चुनाव हार गए।

राजनीति में कैसे आए पुरोहित?

16 अप्रैल 1940 को राजस्थान में जन्मे पुरोहित ने अपनी स्कूली शिक्षा बिशप कॉटन स्कूल, नागपुर और राजस्थान से की. इसके बाद उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से वाणिज्य की डिग्री प्राप्त की. पुरोहित की राजनीति में काफी रुचि थी और उन्होंने महाराष्ट्र के पिछड़े क्षेत्र विदर्भ की हालत सुधारने के लिए चुनावी मैदान उतरने का फैसला किया। उन्होंने कांग्रेस (आई) के सदस्य के रूप में 1978 में नागपुर पूर्व क्षेत्र से और 1980 में नागपुर दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीता। 1982 में पुरोहित ने महाराष्ट्र सरकार में शहरी विकास, स्लम सुधार और आवास राज्य मंत्री के रूप में काम किया।

यहां आपको बता दें कि, पुरोहित मध्य भारत के सबसे पुराने अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र 'द हितवाद' के प्रबंध संपादक भी हैं। यह समाचार पत्र 1911 में गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा लॉन्च किया गया था। पुरोहित को 1979 में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी से नागपुर दैनिक समाचार पत्र द हितवाद का स्वामित्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा पुरहित नागपुर में रामदेवबाबा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के अध्यक्ष भी हैं। बेदाग छवि के पुरोहित की पहचान एक प्रख्यात शिक्षाविद्, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्रवादी विचारक की रही है। उनके पास सार्वजनिक जीवन में चार दशकों से भी अधिक का अनुभव रहा है।