Punjab & Haryana HC Orders DA Arrears

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: DA बकाया देना सरकार की जिम्मेदारी, 30 जून तक भुगतान के आदेश

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Punjab & Haryana HC Orders DA Arrears

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाया को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने 94 पन्नों के आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारियों के समान बकाया राशि का भुगतान 30 जून तक सुनिश्चित करे।

अदालत ने राज्य सरकार की वित्तीय तंगी और संसाधनों की कमी वाली दलील को खारिज करते हुए कहा कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद एरियर देने से पीछे नहीं हट सकते। अदालत ने यह भी कहा कि आर्थिक कठिनाइयों को सरकारी जिम्मेदारियों से बचने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

सुनवाई के दौरान 18 फरवरी 2025 को जारी ‘लिक्विडेशन प्लान’ को भी रद्द कर दिया गया, जिसमें पेंशनरों को उम्र के आधार पर अलग-अलग किश्तों में भुगतान का प्रस्ताव था। अदालत ने इसे कृत्रिम वर्गीकरण बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना।

अदालत ने कहा कि जहां IAS, IPS और अन्य ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारियों को नियमित DA दिया जा रहा है, वहीं राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जिसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मुख्य सचिव को आदेशों के पालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है और 2 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी कि तय समय में भुगतान न होने पर बकाया राशि पर ब्याज देने पर भी विचार किया जाएगा।

यह फैसला निर्मल सिंह धनेआ समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर आया है, जिनमें बताया गया कि 2016 से अब तक करीब 35,000 पेंशनर अपने बकाया का इंतजार करते हुए दुनिया छोड़ चुके हैं। अदालत ने कहा कि देरी से भुगतान करने से महंगाई भत्ते का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है, इसलिए समय पर भुगतान अनिवार्य है।