जेवर एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस: देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे के संचालन की तैयारी तेज
Preparations for operationalisation of the country's largest airport in full swing
Jewar Airport gets aerodrome license: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है. अब ऐसी उम्मीद है बहुत जल्द देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट के पहले चरण के शुरू होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है. जेवर एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस सीएम को प्रस्तुत किया. इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है. इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
उद्घाटन से पहले सुरक्षा मंजूरियों की अंतिम प्रक्रिया
नोएडा एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी. अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब कुछ अन्य अनुमतियां हासिल करने की अंतिम प्रक्रिया जारी है. एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है. सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा.
चार चरणों में एयरपोर्ट का निर्माण
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है. इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस कैपेसिटी और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा. एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन है. एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है. पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी.
एयरपोर्ट पर क्या कुछ खास, यहां जानिए
एयरपोर्ट के दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी. तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं. इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है. रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है. एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है.
हर लिहाज से मॉडर्न होगा जेवर एयरपोर्ट
शुरुआती चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा. तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. यहां डिजियात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके. सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है. परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं.