गर्भवती महिलाएं रोज करें ये पांच योगासन, माँ और बच्चे दोनों सेहत रहेगी अच्छी
गर्भवती महिलाएं रोज करें ये पांच योगासन

गर्भवती महिलाएं रोज करें ये पांच योगासन, माँ और बच्चे दोनों सेहत रहेगी अच्छी

गर्भवती महिलाएं रोज करें ये पांच योगासन, माँ और बच्चे दोनों सेहत रहेगी अच्छी

नई दिल्ली। प्रेग्नेंसी का समय खूबसूरत और बेहतरीन समय होता है, लेकिन यह आसान नहीं होता क्योंकि इस समय मां के शरीर में कई तरह के बदलाव आ रहे होते हैं। तो आपके 9 महीने आरामदायक गुज़रें इसके लिए आप क्या कर सकती हैं? एक्सरसाइज़! जी हां, आप चाहे कितनी भी थकावट क्यों न महसूस कर रही हों, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान वर्कआउट करना न सिर्फ आपके लिए बल्कि आपके होने वाले बच्चे के लिए भी लाभदायक होगा।

ऐसे में योग एक ऐसा अभ्यास है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के लिए न सिर्फ सुरक्षित बल्कि फायदेमंद भी होता है। इससे आपको प्रेग्नेंसी के दौरान दर्द से मुक्ति मिलेगी और आपका शरीर लेबर और डिलिवरी के लिए तैयार भी होगा। साथ ही योग में शामिल सांस लेने की प्रक्रिया तनाव दूर करेगी।

तो आइए जानें कि प्रेग्नेंसी के दौरान कौन-कौन से आसन करने चाहिए:

मार्जरी आसन/ गोमुखासन

अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान आप पीठ दर्द से जूझ रही हैं, तो आपको ये दोनों आसन करने चाहिए। इस आसन में आपकी रीढ़ खिंचती है और पेट हवा में लटका होता है, जिससे आपको दर्द में आराम मिल सकता है। ये आसन बच्चे को सही पोज़ीशन में लाने के भी काम आते हैं।

दंडयामना भर्मानासन

 

यह आसन गर्भवति महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह बॉडी वॉल को मजबूत बनाने का काम करता है। बॉडी वॉल ही बच्चे को पेट में सहारा देती है. इसलिए इसका मज़बूत होना बहुत ज़रूरी है।

अधोमुख श्वानासन

इस आसन को आप दीवार के सहारे से कर सकती हैं। यह आसन आपकी पीठ के ऊपरी हिस्से और कंधों के दर्द को आराम देगा। जिन गर्भवति महिलाओं को सीने में जलन की समस्या रहती है, उन्हें यह आसन ज़रूर करना चाहिए।

उत्कट कोणासन

इस आसन को भी प्रेग्नेंसी के दौरान बेहद कारगर माना जाता है। इस आसन से भी महिलाओं की बॉडी वॉल को मज़बूती मिलती है। इस आसन के नियमित अभ्यासस से हिप्स भी खुलते हैं, जिससे डिलेवरी के समय किसी तरह की दिक्कत नहीं होती।

बद्ध कोणासन

इस आसन को करते समय अपना पॉश्चर सही बनाए रखें और गहरी सांसें लें। इसके अलावा आप पैरों और काफ मसल्स की मसाज भी करें, इससे ब्लड सर्क्यूलेशन बेहततर होता है और अतिरिक्त वज़न के भार का स्ट्रेस भी कम होता है।

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।