नोएडा सेक्टर-150 में युवराज मेहता की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल
PIL in Allahabad High Court on the death of Yuvraj
नोएडा। नोएडा में सेक्टर-150 स्थित एससी 02 भूखंड के बेसमेंट गड्ढे में गिरकर युवराज मेहता की कार समेत डूबने से मौत हो गई थी। इस प्रकरण पर एसआईटी की जांच हुई, लेकिन आज तक इस रिपोर्ट के आधार पर किसी पर कार्रवाई तय नहीं हो सकी।
वहीं, ऐसे में अब इस प्रकरण पर इलाहबाद हाईकोर्ट में पीआइएल दाखिल हुई है। 17 मार्च को सुनवाई होगी। रिस्पांस टीम से लेकर प्राधिकरण से युवराज मौत पर जवाब मांगा गया है।
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में बार-बार सामने आ रही गंभीर घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है।
17 मार्च को होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च तय की है। याचिकाकर्ता हिमांशु जायसवाल की ओर से दायर पीआइएल में नोएडा क्षेत्र में आवर्ती घटनाओं जिनमें सार्वजनिक सुरक्षा, स्ट्रक्चर जोखिम और आपदा प्रबंधन से जुड़े पहलू शामिल करते हुए प्रभावी रोकथाम उपायों की मांग की गई है।
वहीं, सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ वकील और राज्य की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल ने अदालत से निर्देश प्राप्त करने और काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली तारीख तक उठाए गए प्रस्तावित कदमों का ब्योरा प्रस्तुत किया जाए। याचिका में उत्तर प्रदेश सिंचाईं विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) को भी पक्षकार बनाया गया है।
जवाबदेही पर चर्चा तेज हुई
अदालत के निर्देश के बाद अब इन एजेंसियों के बीच समन्वय और जवाबदेही पर चर्चा तेज हो गई है। ये याचिका हाल ही में नोएडा के सेक्टर-150 में युवराज की मौत के बाद लगाई गई। इसमें नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, अग्निशमन और पुलिस पर सवालिया निशान लगे थे।
युवराज की मौत 16 जनवरी को सेक्टर-150 के एससी-02 ए-3 प्लॉट के बेसमेंट में भरे पानी में डूबने से हो गई थी। इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक एसआईटी गठन किया था। पांच दिनों की जांच और 150 से ज्यादा बयान के बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब तक इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ. लोकेश एम और एक जेई को ही हटाया गया। इसके बाद से कोई कार्रवाई नहीं की गई।