आईपीएस अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 'पुलिस ऑब्जर्वर' पद से हटाने की मांग
Petition filed in Supreme Court against IPS Ajay Pal Sharma
लखनऊ। पश्चिम बंगाल के चुनाव में बतौर पर्यवेक्षक पहुंचे उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा की सख्ती तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को रास नहीं आ रही है। सख्त मिजाज और नियम के तहत काम करने वाले अधिकारी के रूप में विख्यात अजय पाल शर्मा के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट के दखल देने से इनकार करने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
प्रयागराज में एडीशनल पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है और उनको पुलिस ऑब्जर्वर पद से हटाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने मंगलवार देर रात अर्जी दायर की और उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के अधिकार की रक्षा करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा की ने बतौर चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर के रूप में अपेक्षित निष्पक्षता का पालन नहीं किया है। याचिका में दावा किया गया है कि अजय पाल शर्मा ने साउथ 24 परगना में तैनाती के दौरान कथित तौर पर सियासी दलों के उम्मीदवारों को निशाना बनाते हुए उनका डराया-धमकाया। इसके साथ ही अनुचित प्रभाव डालने जैसे कृत्य में हिस्सा लिया।
चुनाव प्रभावित करने की आशंका
याचिका अर्जी में कहा गया कि अजय पाल शर्मा की मौजूदगी पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही है। इससे बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं। इसमें यह भी आरोप है कि इस प्रकार के आचरण से चुनावों में लेवल प्लेइंग फील्ड प्रभावित होती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मूल आधार होती है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला
याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला देते हुए कहा गया कि लोकतांत्रिक मानकों के पालन और स्वतंत्र निगरानी को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति चुनाव वाले राज्य में की जाती है। लेकिन ऐसे में यदि कोई पर्यवेक्षक अपनी जिम्मेदारी से भटकता है, तो यह पूरे इलेक्टोरल सिस्टम में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मामले को संज्ञान में लेने और जरूरी निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही, पश्चिम बंगाल में चल रही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने की अपील भी की है।
अजय पाल के खिलाफ हाई कोर्ट में मामला खारिज
आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा बंगाल विधानसभा चुनाव में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त हैं। अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के घर के बाहर उसे कड़ी चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। अजय पाल शर्मा को लेकर टीएमसी की तरफ से कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि उनके दखल देने से आचार संहिता का उल्लंघन होगा, इसलिए वे 29 अप्रैल तक इस मामले में दखल नहीं दे सकते।
क्या है प्रकरण
दूसरे चरण के मतदान से पहले बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में सोमवार को मतदाताओं को डराने और उनके पहचान पत्र छीनने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पर पुलिस और केंद्रीय बलों ने दबिश दी थी। इसका नेतृत्व उत्तर प्रदेश के धाकड़ आईपीएस अधिकारी और चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा कर रहे थे।
छापामारी के दौरान जहांगीर खान घर पर मौजूद नहीं मिले। अजय पाल ने उम्मीदवार के परिवार और समर्थकों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें साफ बता दीजिए कि लोगों को डराने-धमकाने की जो शिकायतें मिल रही हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। बाद में पछताने का मौका नहीं मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश और प्रतिशोध बताया।