पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: रीतलाल यादव की याचिका खारिज

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: रीतलाल यादव की याचिका खारिज

Patna High Court big decision: Reetlal Yadav petition dismissed

Patna High Court's big decision: Reetlal Yadav's petition dismissed

पटना। पटना हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक रीतलाल यादव के जेल स्थानांतरण को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आदेश को सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है, तो मात्र इस आधार पर उसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उस पर हस्ताक्षर अधीनस्थ अधिकारी के हैं।

मामला 30 अक्टूबर 2025 के उस आदेश से जुड़ा था, जिसे सहायक महानिरीक्षक (कारा एवं सुधार सेवाएं), बिहार द्वारा जारी किया गया था।
इस आदेश के तहत पहले पारित 30 अप्रैल 2025 के ट्रांसफर आदेश की अवधि छह माह के लिए बढ़ाई गई थी, जिसके तहत रीतलाल यादव को बेऊर केंद्रीय कारा, पटना से भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा (तृतीय खंड) स्थानांतरित किया गया था।

यह विस्तार जिला दंडाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना की अनुशंसा पर किया गया था।


याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव कुमार वर्मा ने दलील दी कि बिहार जेल मैनुअल, 2012 के नियम 781(7) तथा कैदी अधिनियम, 1900 की धारा 29(3) के तहत इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार केवल महानिरीक्षक (आईजी) को है।

ऐसे में एआईजी द्वारा जारी आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे रद किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने तथ्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि संबंधित आदेश को महानिरीक्षक (कारा) की स्वीकृति प्राप्त थी और एआइजी ने केवल उसे संप्रेषित किया था।

कोर्ट ने कहा कि इसे शक्तियों के प्रत्यायोजन (डेलीगेशन) का मामला नहीं माना जा सकता।
साथ ही, न्यायालय ने यह भी माना कि प्रशासन ने विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया था और इसमें किसी प्रकार की मनमानी या अधिकारों का दुरुपयोग परिलक्षित नहीं होता। इन तथ्यों के आधार पर पटना हाई कोर्ट ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।