"एक फोन कॉल और जिंदगी बर्बाद": शेखावत के बयान पर राजस्थान में सियासी भूचाल
"One Phone Call and a Life Ruined"
Rajasthan Politics: "One Phone Call and a Life Ruined" राजस्थान की सियासत में एक बयान ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है. केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर ब्यूरोक्रेसी को खुलेआम धमकाने के आरोप लगे हैं. एक फोन कॉल से अधिकारियों की नौकरी और जिंदगी बर्बाद हो सकती है, उनकी इस एक लाइन ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है. कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और प्रशासनिक ढांचे पर हमला बताया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जब मंत्री खुलेआम कहें कि नौकरी और ज़िंदगी बर्बाद कर दूंगा, तो ये सिर्फ एक अफसर की नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे का अपमान है.
'कार्यकर्ता से बदतमीजी पर डबल बदतमीजी'
दरअसल, जोधपुर के बापीनी में जनसुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर कार्यकर्ताओं के काम नहीं होंगे, गलत व्यवहार होगा तो एक फोन कॉल से नौकरी और जिंदगी बर्बाद हो सकती है. केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि अगर किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे तो मैं उससे डबल बदतमीजी से बिहेव करूंगा. उसकी नौकरी व जिंदगी दोनों बर्बाद कर दूंगा.
शेखावत के बयान के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि अधिकारी हमारी सुनते नहीं तो शेखावत ने चेतावनी दी कि नौकरी खराब करने के लिए कोई कागज लिखने की जरूरत नहीं, मात्र एक टेलीफोन से ही नौकरी खराब हो जाएगी. मैं बीस साल कहीं जाने वाला नहीं हूँ. शेखावत ने यह भी कहा कि अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह रहें. हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी अनुशासन में रहने की नसीहत दी. केंद्रीय मंत्री शेखावत के इस बयान ने प्रदेश का सियासी पारा हाई कर दिया है.
अगर शिकायत थी तो मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए थी या प्रधानमंत्री तक मामला रखना चाहिए था. इस तरह से सार्वजनिक मंच से ब्यूरोक्रेसी को धमकाना पूरे सिस्टम का मनोबल गिराने वाला है. मैं अधिकारियों से कहता हूं, डरिए मत, झुकिए मत. संविधान के अनुसार काम करें, कांग्रेस आपके साथ खड़ी है.
'एक अफसर नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे का अपमान'
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अधिकारियों को डराना-धमकाना भाजपा नेताओं की प्रवृत्ति बन चुकी है. शेखावत का यह बयान स्तरहीन है. संभवतः मुख्यमंत्री न बनाए जाने की हताशा इस तरह के बयानों में दिख रही है. इससे पहले भी अधिकारियों पर दबाव बनाने की घटनाएं सामने आई हैं. हम कर्मचारियों से अपील करते हैं कि बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार काम करें. वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जब मंत्री खुलेआम कहें कि नौकरी और ज़िंदगी बर्बाद कर दूंगा, तो ये सिर्फ एक अफसर की नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे का अपमान है. ये उनकी निराशा और हताशा का प्रतीक है. एक तरह से उन्होंने अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं.