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Wednesday, November 21, 2018
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एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर केंद्र को दोबारा नोटिस, मांगा जवाब

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर केंद्र को दोबारा नोटिस, मांगा जवाब

नैनीताल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार की ओर से अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम 1989 में हाल ही में किये गये संविधान संशोधन की वैधानिकता के संबंध में केंद्र से जवाब मांगा है। अदालत ने केन्द्र सरकार को इस संबंध में दूसरी दुबारा नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। इससे पहले विगत 31 अगस्त को भी इसी संबंध में केन्द्र को नोटिस जारी किया गया था।

इस मामले को अधिवक्ता सनप्रीत सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका लंबित होने के बाद अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम में संशोधन किया है जो कि संवैधानिक रूप से गलत है।

अधिवक्ता सनप्रीत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इसी वर्ष मार्च में एक आदेश जारी कर कहा था कि अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के अंतर्गत अपराधों के तहत गिरफ्तारी से पूर्व मंजूरी जरूरी है। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद विवाद उत्पन्न हो गया था। इसके बाद केन्द्र सरकार ने शीर्ष अदालत में एक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया कि पुनरीक्षण याचिका पर फैसला आने से पहले ही केन्द्र सरकार की ओर से अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम में संशोधन कर
दिया गया।

जो कि संवैधानिक रूप से गलत है। पुनरीक्षण याचिका के लंबित होने के बावजूद केन्द्र सरकार अधिनियम में संशोधन नहीं कर सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले में सादिक बनाम केरल सरकार 2015 मामले का हवाला दिया गया। जिसमें कहा गया है कि विधायिका अदालत के फैसले को सीधे रद्द नहीं कर सकती है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की संयुक्त पीठ में हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया अदालत ने केन्द्र सरकार को जवाब पेश करने को कहा था लेकिन सरकार ने जवाब पेश नहीं किया।  अधिवक्ता ने बताया कि इसके बाद अदालत ने कल केन्द्र को दुबारा नोटिस जारी किया है। अदालत ने संविधान संशोधन की धारा 18 ए को लेकर केन्द्र से आठ सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने को कहा है।

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