NCERT कक्षा 9: नया पाठ्यक्रम (सत्र 2026-27); रटने की जगह 'समझ' पर जोर
NCERT Class 9: New syllabus (session 2026-27)
मेरठ। NCERT Class 9: New syllabus (session 2026-27), नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के तहत कक्षा नर्सरी से लेकर आठवीं तक की कक्षाओं में नया सिलेबस लागू किया जा चुका है। इस कड़ी में अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा नौ के लिए संशोधित ड्राफ्ट पाठ्यक्रम जारी किया है। यह नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाएगा। इसके तहत रटने वाली पढ़ाई की जगह कौशल आधारित (कम्पीटेंसी-बेस्ड) सीखने, व्यावहारिक समझ और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष जोर दिया गया है।
कक्षा 10 भी माध्यमिक स्तर का हिस्सा है, लेकिन फिलहाल विस्तृत मसौदा मुख्य रूप से कक्षा नौ के लिए जारी किया गया है। नए पाठ्यक्रम के अनुसार कुछ विषयों में अध्यायों की संख्या कम की गई है, जबकि कई उन्नत और व्यावहारिक विषयों को जोड़ा गया है। विशेष बात यह देखी जा रही है कि नौवीं विज्ञान विषय में विद्यार्थियों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलाजी के साथ ही अर्थ साइंस यानी पृथ्वी विज्ञान भी पढ़ाया जाएगा।
विज्ञान में नया दृष्टिकोण, ‘पृथ्वी प्रणाली’ की अवधारणा शामिल
संशोधित विज्ञान पाठ्यक्रम में विज्ञान शिक्षा की प्रकृति, उद्देश्य और सीखने के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस नए पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को कम कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और अनुसंधान आधारित सीखने को बढ़ावा देना है।
नए पाठ्यक्रम में विज्ञान को केवल तथ्यों का संग्रह नहीं माना गया है, बल्कि इसे प्राकृतिक और भौतिक दुनिया को समझने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया बताया गया है। इसमें विद्यार्थियों को अवलोकन (आब्जर्वेशन), प्रश्न पूछना, परिकल्पना बनाना, प्रयोग करना, प्रमाणों का विश्लेषण करना और ज्ञान को लगातार संशोधित करना जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से सीखने पर जोर दिया गया है।
इससे छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, प्रमाण-आधारित सोच और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। विज्ञान विषय को भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान के दृष्टिकोण से पुनर्गठित किया गया है और इसमें कुल 11 अध्याय होंगे। भौतिकी में गुरुत्वाकर्षण अध्याय को हटा दिया गया है, जबकि वर्क एंड एनर्जी को विस्तार देकर वर्क, एनर्जी एंड सिंपल मशीनें बनाया गया है, जिसमें पुली, लीवर और तिरछे तल जैसे विषय जोड़े गए हैं। रसायन विज्ञान में मैटर इन आवर सराउंडिंग्स अध्याय को हटाकर एटम्स एंड मालिक्यूल्स और स्ट्रक्चर आफ एटम पर अधिक ध्यान दिया गया है।
जीवविज्ञान में रिप्रोडक्शन और डाइवर्सिटी नामक दो नए अध्याय शामिल किए गए हैं, जबकि इम्प्रूवमेंट इन फूड रिसोर्सेज को हटाया गया है। इसके अलावा नया खंड ‘अर्थ ऐज ए सिस्टम: एनर्जी, मैटर एंड लाइफ’ पर्यावरण और जीवों के पारस्परिक संबंधों को समझाने पर केंद्रित होगा।
एक नहीं बहु-विषयक दृष्टिकोण को मिला है बढ़ावा
नए पाठ्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विज्ञान को अन्य विषयों से जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी और पृथ्वी विज्ञान के साथ-साथ गणित, कम्प्यूटेशनल साइंस और सामाजिक विज्ञान के तत्वों को भी शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान की अंतरविषयक (इंटरडिस्पीलनरी) समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार माध्यमिक स्तर के पहले दो वर्षों यानी कक्षा नौ और 10 में विज्ञान को एकीकृत विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें जीवविज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और पृथ्वी विज्ञान को एक साथ जोड़कर पढ़ाया जाएगा। इसके बाद कक्षा 11 और 12 में इन विषयों को अलग-अलग विषयों के रूप में पढ़ाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को विषय की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
पाठ्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया है कि विज्ञान स्थिर नहीं बल्कि लगातार विकसित होने वाला ज्ञान है। नए प्रमाण और शोध के आधार पर वैज्ञानिक सिद्धांतों और अवधारणाओं में परिवर्तन संभव है। इसलिए छात्रों को तार्किक सोच, प्रयोग और परीक्षण, साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया को समझाने पर जोर दिया गया है।
भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान और पारंपरिक ज्ञान भी हुआ शामिल
नए पाठ्यक्रम में भारत के वैज्ञानिक योगदान और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि भारत का भी वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पाठ्यक्रम में विज्ञान शिक्षा को जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं, सतत विकास और सामाजिक समानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से जोड़कर पढ़ाने की बात कही गई है।
इससे विद्यार्थियों को विज्ञान की सामाजिक भूमिका और उसके व्यावहारिक महत्व को समझने में मदद मिलेगी। महावीर ग्रुप आफ स्कूल के निदेशक असीम कुमार दुबे के अनुसार यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। अब विज्ञान केवल परीक्षा के लिए पढ़ाया जाने वाला विषय नहीं रहेगा, बल्कि यह छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का माध्यम बनेगा। यदि इस पाठ्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो यह विद्यार्थियों को जिज्ञासु, नवाचारी और शोध-उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.