"उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती: बुंदेलखंड से कृषि क्रांति"

"उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती: बुंदेलखंड से कृषि क्रांति"

Natural Farming in Uttar Pradesh

Natural Farming in Uttar Pradesh

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में कृषि की सूरत बदलने के लिए प्राकृतिक खेती को मिशन मोड पर अपना लिया है। सरकार की सक्रिय रणनीति के चलते अब तक प्रदेश के सभी 75 जनपदों में 94,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जा चुका है, जो जल्द ही एक लाख हेक्टेयर के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने वाला है। यह अभियान केवल खेती का विस्तार नहीं, बल्कि रासायनिक निर्भरता को खत्म कर एक टिकाऊ और स्वास्थ्यवर्धक कृषि व्यवस्था स्थापित करने का एक बड़ा संकल्प है।

बुंदेलखंड: प्राकृतिक खेती का नया मॉडल

इस व्यापक अभियान के केंद्र में बुंदेलखंड क्षेत्र को रखा गया है। योगी सरकार ने झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जैसे जनपदों में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र पर विशेष 'गो-आधारित प्राकृतिक खेती' कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में कृषि को अधिक टिकाऊ और किसानों के लिए लाभकारी बनाना है, जिससे यह क्षेत्र पूरे प्रदेश के लिए एक सफल मॉडल के रूप में उभर सके।

लागत में कमी और आय में वृद्धि का मंत्र

योगी सरकार का मुख्य फोकस 'कम लागत, ज्यादा लाभ' के सिद्धांत पर आधारित है। जीवामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर रासायनिक खादों और महंगे कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम की जा रही है। इससे न केवल खेती की इनपुट लागत घट रही है, बल्कि शुद्ध और प्राकृतिक फसल के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

पर्यावरण और मिट्टी का संरक्षण

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, प्राकृतिक खेती मिट्टी की संरचना में सुधार करती है और उसकी जलधारण क्षमता को बढ़ाती है। यह विशेषता बुंदेलखंड जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के प्रसार से मानव स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था में भी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

आत्मनिर्भर किसान और विशेष प्रशिक्षण

किसानों को इन आधुनिक तकनीकों से लैस करने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है ताकि वे प्राकृतिक कृषि प्रणाली को मुख्यधारा का हिस्सा बना सकें। उत्तर प्रदेश की यह दूरदर्शी नीति पर्यावरण संरक्षण और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक 'गेमचेंजर' साबित हो रही है।