National Institute of Technology Hamirpur

National Institute of Technology Hamirpur के छात्रों का कमाल, अंडे के छिलकों से बनी ‘बायोडिग्रेडेबल रॉड’ से फ्रैक्चर इलाज में क्रांति

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National Institute of Technology Hamirpur

हिमाचल प्रदेश स्थित National Institute of Technology Hamirpur के छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैटीरियल साइंस विभाग के विद्यार्थियों ने अंडे के छिलकों और जैविक तत्वों की मदद से एक ‘बायोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड’ तैयार किया है, जो हड्डी के फ्रैक्चर को जोड़ने के बाद शरीर में स्वयं घुल जाता है।

यह तकनीक मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पारंपरिक धातु (टाइटेनियम) रॉड हटाने के लिए होने वाली दूसरी सर्जरी की जरूरत खत्म हो जाएगी।

कैसे तैयार हुआ यह स्कैफोल्ड?
इस प्रोजेक्ट को डॉ. विक्रम वर्मा के मार्गदर्शन में छात्रों सक्षम, कृष, तनिष्क और प्रकृति ने विकसित किया।

  • अंडे के छिलकों से कैल्शियम कार्बोनेट निकाला गया
  • इसे ऑर्थोफॉस्फोरिक एसिड के साथ रिएक्शन कर ‘हाइड्रॉक्सीएपेटाइट’ बनाया गया
  • यह वही पदार्थ है, जो मानव हड्डियों का मुख्य घटक होता है
  • इसके बाद इसे जिलेटिन और काइटोसैन जैसे बायोपॉलिमर के साथ मिलाकर -55°C पर प्रोसेस किया गया

तैयार स्कैफोल्ड हड्डी के अंदर प्राकृतिक संरचना की तरह काम करता है और समय के साथ शरीर में अवशोषित हो जाता है।

पारंपरिक तकनीक से कैसे अलग?
मौजूदा समय में फ्रैक्चर के इलाज के लिए टाइटेनियम रॉड का उपयोग किया जाता है, जिसे बाद में निकालने के लिए दूसरी सर्जरी करनी पड़ती है। यह न केवल महंगी होती है, बल्कि मरीज के लिए दर्दनाक भी होती है।

इसके विपरीत, यह नया बायोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड शरीर में ही घुल जाता है, जिससे इलाज अधिक सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में हड्डी से जुड़ी सर्जरी के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं।