man worked on fake documents for 20 years, this is how iहरियाणा में आया बड़ा मामला सामने: 20 साल फर्जी दस्तावेजो पर की नौकरी, ऐसे हुआ खुलासा

हरियाणा में आया बड़ा मामला सामने: 20 साल फर्जी दस्तावेजो पर की नौकरी, ऐसे हुआ खुलासा

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फरीदाबाद जिले से सामने आया फर्जी दस्तावेजों और नाम बदलकर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लगभग दो दशकों तक शिक्षा विभाग में नौकरी करना, वेतन और अन्य लाभ लेना और अंततः सेवानिवृत्त हो जाना—यह सब बिना किसी ठोस सत्यापन के संभव हुआ, यह अपने-आप में चिंता का विषय है।

सराय ख्वाजा स्थित राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा के प्रिंसिपल की शिकायत पर दर्ज यह मामला बताता है कि कैसे आरोपी ने पहचान बदलकर और संदिग्ध शैक्षणिक डिग्रियों के सहारे सिस्टम को लंबे समय तक गुमराह किया। सवाल यह नहीं है कि आरोपी ने धोखा दिया—सवाल यह है कि इतने वर्षों तक कोई पकड़ क्यों नहीं पाया?

पहचान बदलना, डिग्री गढ़ना और नियमों की अनदेखी

जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने मूल नाम से पढ़ाई की और बाद में नाम बदलकर शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। सेना में सेवा के दौरान नियमित बीएड डिग्री लेना, वह भी बिना बीए के आधार पर—यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला भी है।
यह तथ्य कि बीएड डिग्री में पिता का नाम तक दर्ज नहीं है, बताता है कि दस्तावेजों की बुनियादी जांच तक नहीं की गई।

शिक्षा विभाग की जवाबदेही कहां?

यह मामला केवल शिक्षा विभाग हरियाणा की लापरवाही नहीं दर्शाता, बल्कि यह उस संस्कृति को उजागर करता है जहां सत्यापन प्रक्रिया औपचारिकता बनकर रह गई है। अगर सीएम विंडो पर शिकायत न होती, तो शायद यह मामला कभी सामने ही नहीं आता।

यह भी विचारणीय है कि भर्ती के समय, सेवा के दौरान प्रमोशन, वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्ति तक—किसी भी स्तर पर दस्तावेजों का पुनः सत्यापन क्यों नहीं किया गया?

नुकसान सिर्फ सरकारी खजाने का नहीं

इस तरह की धोखाधड़ी से नुकसान केवल सरकारी धन का नहीं होता, बल्कि:

  • योग्य अभ्यर्थियों के हक मारे जाते हैं

  • शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है

  • सरकारी संस्थानों पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है

एक शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं होता, वह समाज की पीढ़ियों को गढ़ने की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में फर्जी योग्यता वाला व्यक्ति यदि वर्षों तक कक्षा में पढ़ाता रहा, तो यह सामाजिक नुकसान भी कम नहीं।

आगे का रास्ता

अब जब सराय ख्वाजा थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है, तो जांच केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी तय होना चाहिए कि:

  • सत्यापन में चूक कहां हुई

  • किन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत रही

  • और क्या पूरे विभाग में ऐसे और मामले छिपे हैं

फरीदाबाद का यह मामला चेतावनी है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और सत्यापन को तकनीकी और संस्थागत रूप से मजबूत करना अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
अगर सिस्टम समय रहते नहीं जागा, तो ऐसे मामले न केवल दोहराए जाएंगे, बल्कि जनता का भरोसा भी धीरे-धीरे खत्म होता जाएगा।