मंडी सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला: "कमाने में सक्षम होना गुजारा भत्ता न देने का आधार नहीं", पति की अपील खारिज
Major Verdict by Mandi Sessions Court
मंडी। Major Verdict by Mandi Sessions Court, हिमाचल प्रदेश में जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पति को अपनी पत्नी को 4,000 रुपये प्रति माह अंतरिम गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था।
मामले के अनुसार लगधर (कोटली) निवासी कांता देवी का विवाह 10 मार्च 2015 को विजय कुमार के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। कांता देवी ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद ही पति और ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और अंततः उसे घर से निकाल दिया। वह किराये के मकान में रह रही है और उसके पास आय का कोई साधन नहीं है।
अपीलकर्ता विजय कुमार ने ट्रायल कोर्ट के नौ दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि वह रक्त संबंधी बीमारी से पीड़ित है और डॉक्टर ने उसे भारी काम न करने की सलाह दी है। उसने दावा किया कि उसकी मासिक आय मात्र 3,000 रुपये है। वह अपने बच्चे का पालन-पोषण भी कर रहा है। साथ ही, उसने पत्नी पर ब्यूटी पार्लर और सिलाई से पैसे कमाने में सक्षम होने का आरोप लगाया।
सत्र न्यायाधीश ने की टिप्पणी
सत्र न्यायाधीश ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि एक शिक्षित या कमाने में सक्षम पत्नी को केवल इस आधार पर गुजारा भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि वर्तमान महंगाई के दौर में 4,000 रुपये की राशि केवल बुनियादी गुजारे के लिए है और यह अत्यधिक नहीं है।
जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
न्यायालय ने पति की बीमारी के दावों को पुराना बताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अदालत ने दोनों पक्षों को 25 मई को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।