सीबीएसई के नए सिलेबस में बड़ा बदलाव, अब लता मंगेशकर का जीवन पढ़ेंगे नौवीं के छात्र

सीबीएसई के नए सिलेबस में बड़ा बदलाव, अब लता मंगेशकर का जीवन पढ़ेंगे नौवीं के छात्र

Major Change in CBSE New Syllabus

Major Change in CBSE's New Syllabus

लखनऊ। Major Change in CBSE's New Syllabus, अब सीबीएसई के नौवीं कक्षा के छात्र सिर्फ साहित्यिक दिग्गजों को ही नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की महान हस्ती लता मंगेशकर के जीवन और संघर्ष को भी पढ़ेंगे।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नया पाठ्यक्रम लागू करते हुए हिंदी की नई पुस्तक ‘गंगा’ तैयार की है, जिसमें पहली बार स्वर कोकिला लता मंगेशकर का एक चर्चित साक्षात्कार शामिल किया गया है। यह बदला हुआ सिलेबस इस शैक्षणिक सत्र से देशभर के सभी सीबीएसई स्कूलों में लागू हो गया है।

नई पुस्तक में गद्य खंड के अंतर्गत ‘ऐसे भी बातें होती हैं’ शीर्षक से लेखक यतींद्र मिश्र द्वारा लिया गया लता मंगेशकर का साक्षात्कार शामिल किया गया है। करीब 12 पृष्ठों में प्रस्तुत यह संवाद लता जी के जीवन, उनके संघर्ष, साधना और सफलता की कहानी को सहज और भावनात्मक शैली में सामने लाता है।

इसमें खासतौर पर उनके पिता से मिले संस्कारों और जीवन में उनसे मिली हिम्मत का भी उल्लेख है। इस बार पाठ्यक्रम में प्रेमचंद, रैदास, तुलसीदास, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुभद्रा कुमारी चौहान और मोहन राकेश जैसे साहित्यकारों की रचनाओं के साथ लता मंगेशकर को शामिल करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

शिक्षाविदों के अनुसार, इस पाठ को शामिल करने से छात्रों के भाषा कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वे साक्षात्कार लेखन की शैली को समझ पाएंगे और भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से भी जुड़ सकेंगे। यह पाठ छात्रों को लता मंगेशकर के व्यक्तित्व, उनके संगीत दृष्टिकोण और जीवन मूल्यों से परिचित कराते हुए अनुशासन, समर्पण और संवेदनशीलता जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा देगा।

लेखक यतींद्र मिश्र ने बताया कि उन्हें अभी तक इस पाठ के शामिल होने की औपचारिक जानकारी नहीं थी, हालांकि एनसीईआरटी ने पहले उनसे अनुमति ली थी। उन्होंने वर्ष 2009 से 2016 के बीच लता मंगेशकर के साथ करीब से काम किया और उनकी जीवनी ‘लता: सुर गाथा’ लिखी।

इसी पुस्तक के एक अंश को अब पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। साक्षात्कार लेते समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह स्कूल की किताब का हिस्सा बनेगा।

किसी भी लेखक के लिए यह बड़ी उपलब्धि होती है कि उसके शब्द समाज और बच्चों तक पहुंचें। यह साक्षात्कार सिर्फ एक महान कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और साधना का जीवंत दस्तावेज है।