उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: डॉक्टर पर लगा 1 करोड़ रुपये का जुर्माना
Major Action by Uttar Pradesh Health Department
अमरोहा। Major Action by Uttar Pradesh Health Department, प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश ने सबको चौंका दिया है। यह आदेश उन डॉक्टरों के लिए नजीर बना है जो नियमों को ताक पर रखते हैं। यह प्रदेश का ऐसा पहला मामला है जिसमें चिकित्साधिकारी पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। अनुबंध तोड़कर ड्यूटी से गैरहाजिर चले रहे जनपद निवासी व गाजियाबाद जनपद में तैनात चिकित्साधिकारी डाॅ. पीतम सिंह पर शासन ने शिकंजा कस दिया है।
नीट पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के उपरांत स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान नहीं देने पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक प्रशिक्षण डाॅ. रंजना खरे ने उनसे अनुबंध में निर्धारित एक करोड़ रुपये की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं, जिसके बाद से विभाग में खलबली मची है।
यह है पूरा मामला
जनपद के गांव कोटा निवासी डाॅ. पीतम सिंह पुत्र फूल सिंह ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 17 अगस्त 2010 को चिकित्साधिकारी के पद पर अपनी सेवा शुरू की थी। वह जनपद रायबरेली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऊंचाहार में बतौर चिकित्साधिकारी पद पर तैनात थे।
उन्होंने सीएमओ रायबरेली के माध्यम से नीट पीजी-2017 प्रवेश प्रकि्रया में सम्मिलित होने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। जिसके साथ एक करोड़ रुपये धनराशि का बांड 20 जनवरी 2017 में किया था। उनका चयन डाॅ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमतीनगर लखनऊ में एमडी, माइक्रोबोयालााजी में अध्ययन के लिए हुआ था।
सीएमओ कार्यालय द्वारा चार अप्रैल 2017 को डाॅ. पीतम सिंह को पीजी अध्ययन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया था। सीएमओ रायबरेली द्वारा शासन को अवगत कराया कि डाॅ. पीतम द्वारा पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विभाग में दो सितंबर 2020 को योगदान आख्या प्रस्तुत की गई।
8 सितंबर 2020 को उनका स्थानांतरण जिला एमएमजी चिकित्सालय गाजियाबाद हो गया। उनके बारे में शासन ने मुख्य चिकित्साधीक्षक एमएमजी चिकित्सालय गाजियाबाद से पूछताछ की गई तो पता चला कि डाॅ. पीतम सिंह ने अभी तक स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान नहीं किया है। वह अपने तैनाती स्थल से अनधिकृत रूप से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे हैं।
इस मामले को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक प्रशिक्षण डाॅ. रंजना खरे ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने डीएम अमरोहा व सीएमओ अमरोहा को निर्देश दिए हैं कि डाॅ. पीतम से बांड में निर्धारित एक करोड़ रुपये की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराएं।
यह है नियम
प्रदेश में चिन्हित असेवित सुदूर व दुर्गम क्षेत्र के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्य करने वाले चिकित्साधिकारियों को एमसीआई रेगुलेशन-2000 के तहत स्नातकोत्तर चयन प्रकि्रया में (नीट पीजी पाठ्यक्रम) एक साल कार्य करने के सापेक्ष दस प्रतिशत, दो साल करने के सापेक्ष 20 व तीन साल या उससे अधिक कार्य करने पर 30 प्रतिशत वेटेज (भारांक) प्रदान किया जाता है। ऐसे चयनित चिकित्साधिकारियों को असाधरण अवकाश स्वीकृृत किया जाता है।
चिकित्साधिकारियों को अपने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद अपनी मूल तैनाती स्थान पर योगदान कर दस साल की निरंतन सेवा करनी आवश्यक होती है। विचलन की दशा में उनको एक करोड़ रुपये की धनराशि राज्य सरकार को अदा करने का नियम है।
पाठ्यक्रम में जाने के पूर्व आवेदकों द्वारा इस आशय का बांड विभाग को उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद ही वह विभागीय एनओसी प्राप्त करने के उपरांत चयन प्रकि्रया में प्रतिभाग करता है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक प्रशिक्षण का आदेश प्राप्त हुआ है। चिकित्साधिकारी डाॅ. पीतम सिंह जिले के रहने वाले हैं जबकि, उनकी तैनाती दूसरे जनपदों में रही है। आदेश पर अमल कराने की कार्रवाई की जाएगी।
-डाॅ. योगेंद्र सिंह, प्रभारी सीएमओ।