लखनऊ हत्याकांड: बेटे अक्षत ने पिता मानवेंद्र की हत्या का बड़ा खुलासा - पढें पूरी खबर

लखनऊ हत्याकांड: बेटे अक्षत ने पिता मानवेंद्र की हत्या का बड़ा खुलासा - पढें पूरी खबर

Lucknow murder case

Lucknow murder case: Son Akshat makes a big revelation

Lucknow murder case: लखनऊ में शराब कारोबारी मानवेंद्र की उन्हीं के बेटे अक्षत के हाथों हुई हत्या के बाद से लोगों में बच्चों की परवरिश को लेकर बहस छिड़ गई है। दरअसल, मानवेंद्र और अक्षत के बीच रिश्तों में नौ साल पहले ही दरार पड़ गई थी। इसके पीछे कई वजह बताई जाती हैं। इनमें से एक है अक्षत की मां का वर्ष 2017 में आत्महत्या कर लेना। मानवेंद्र के बहनोई एसएस भदौरिया ने बताया कि अक्षत की मां ने पारिवारिक कलह में जहर खाकर जान दे दी थी। अक्षत इसके पीछे पिता को जिम्मेदार मानता है।

मानवेंद्र की एक महिला से नजदीकियों की चर्चा
इस कारण मां की मौत के बाद अक्षत के मन में पिता के प्रति नफरत भर गई थी। मंगलवार को घर के बाहर जुटे लोगों में इस बात की भी चर्चा रही कि मानवेंद्र की एक महिला से नजदीकियां थीं। 

मानवेंद्र अक्सर पार्टी कर देर रात घर लौटते थे। इसको लेकर भी पिता-पुत्र के बीच तनाव चल रहा था। यही वजह है कि पिता-पुत्रों में धीरे-धीरे दूरी बढ़ती चली गई।

डॉक्टर नहीं बनना चाहता था अक्षत
अक्षत पिता के कहने पर नीट की कोचिंग तो करता था, लेकिन वह डॉक्टर नहीं बनना चाहता था। उसने पिता की हर बात के विपरीत जाकर काम किया। रिश्तों में आई दरार की भनक परिवार के लोगों को थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

पूछताछ में अक्षत ने पुलिस को बताया कि पिता नीट पास करने का दबाव बनाते थे। तीन साल पहले इसी दबाव में वह घर छोड़कर चला गया था। आरोपी ने तब छह पन्ने का नोट छोड़ा था। 

नीट की तैयारी के दबाव में छोड़ा था घर
नोट में उसने लिखा था कि मैं आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा... 'मैं जहां जाऊंगा, आपको बता दूंगा। मैं बड़ा आदमी बनकर ही लौटूंगा।' इस दौरान अक्षत अपने एक दोस्त के संपर्क में था। अक्षत ने दोस्त को कानपुर रेलवे स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया था।

कानपुर रेलवे स्टेशन से लेकर आए थे पिता
मिलने से पहले उसने दोस्त को वीडियो कॉल कर आसपास चारों तरफ दिखाने के लिए कहा था। अक्षत यह देखना चाहता था कि कहीं मानवेंद्र तो उसके साथ नहीं आए हैं। हालांकि, मानवेंद्र ने अक्षत को उसके दोस्त की मदद से कानपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया था और घर ले आए थे। उधर, मंगलवार को मानवेंद्र के घर के बाहर बड़ी संख्या में कॉलोनी के लोग एकत्र थे।

हत्या से दो दिन पहले महिला मित्र से फोन पर हुआ था विवाद
मानवेंद्र के बहनोई एसएस भदौरिया का कहना है कि हत्या की वजह कुछ और है। बिजनेस पार्टनर ने बताया कि हत्या से दो दिन पहले वह मानवेंद्र के साथ कार से लौट रहे थे। इस दौरान एक महिला का फोन मानवेंद्र के पास आया था। 

मानवेंद्र का महिला से विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि महिला के बारे में अक्षत और उसके परिजनों को भी पता है। इसे लेकर कई बार अक्षत से पिता का झगड़ा भी हुआ था।

बेटे के खाते में जमा किए थे पांच लाख रुपये
तीन वर्ष पहले मानवेंद्र ने बेटे और बेटी के खाते में पांच-पांच लाख रुपये जमा किए थे। खाते में रकम आने के बाद अक्षत के खर्च बढ़ गए थे। वह ज्यादा रुपये उड़ाने लगा था। आदत में सुधार नहीं होने पर ही मानवेंद्र ने अक्षत को नौकरी कर कमाने की बात कही थी। अक्षत रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट का व्यापार करना चाहता था, लेकिन मानवेंद्र ने उसे मना कर दिया था।

यह था मामला
लखनऊ के आशियाना के सेक्टर एल में रहने वाले शराब कारोबारी व पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की उन्हीं के बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े कर दोनों हाथ व पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए। सिर सहित धड़ घर के भीतर ड्रम से बरामद किया गया है। पुलिस ने बेटे के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, 21 फरवरी को आशियाना थाने पर मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की शिकायत मिली थी। पुलिस ने सचिवालय सुरक्षा में तैनात मानवेंद्र के भाई अरविंद कुमार से मामले की जानकारी ली। इसके बाद अक्षत से पूछताछ की तो पता चला कि मानवेंद्र बेटे पर नीट परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। 
 

20 फरवरी को सुबह 4:30 बजे इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हो गया। गुस्से में आकर अक्षत ने पिता को लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी। मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के वक्त अक्षत की छोटी बहन कृति अपने कमरे में सो रही थी। 

आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची तो पिता का शव कमरे में पड़ा था। मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह सेवानिवृत्त दरोगा हैं। वह जालौन में रहते हैं। घटना की सूचना पर आशियाना पहुंच गए हैं। पुलिस ने शव के टुकड़ों को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है। हाथ और पैर बरामद कर लिए गए हैं।

हाथ-पैर फेंके, सिर सहित धड़ घर में ड्रम में मिला
वारदात मकान के तीसरे तल पर हुई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद वह शव को घसीटते हुए भूतल पर लाया। यहां खाली कमरे में शव रख दिया। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।

पहले कार में लादकर गोमती नदी में फेंकने की साजिश रची, लेकिन शव का वजन ज्यादा था। इससे वह अकेले ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद आरी खरीदकर लाया और पिता के शव के टुकड़े कर दिए। 

धड़ ठिकाने नहीं लगा सकने पर नीला ड्रम खरीदकर लाया और उसमें डाल दिया। इससे पहले कि अक्षत धड़ को ठिकाने लगाता उसकी करतूत उजागर हो गई।