मजदूर आंदोलनों से बढ़ी हलचल, उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा और राजस्थान तक दिखा असर
Labor movements spark unrest
नई दिल्ली। Labor movements spark unrest, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में वेतन बढ़ोत्तरी समेत सामाजिक सुरक्षा के कई बिंदुओं को लेकर मजदूरों के आंदोलनों व उग्र प्रदर्शनों ने केंद्र तक को सतर्क कर दिया है। दरअसल, हरियाणा से शुरू हुई आग उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। हरियाणा से सटे राजस्थान के इक्के दुक्के स्थानों पर छिटपुट घटना होकर फिलहाल शांत है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में न्यूनतम वेतन देश में सबसे अधिक है और लपटें यहां तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन गर्माती राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए परेशानी बढ़ेगी क्योंकि ये चारो राज्य भाजपा शासित हैं। ऐसे में अगर जरूरत महसूस हुई तो औपचारिक अनौपचारिक रूप से केंद्रीय स्तर पर इन राज्यों की बैठकें कर स्थिति को संभालने की कोशिश होगी।
हरियाणा में क्या हुआ था?
हरियाणा के मानेसर में कुछ दिन पहले हुए मजदूर आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर स्थिति संभाल ली। यूं तो यह सबसे आसान रास्ता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वर्तमान हालात में जब पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण काफी अस्थिरता है और इसका कोई पता नहीं कि हालात कब सामान्य होंगे तो कोई भी कदम व्यापक विचार विमर्श के बाद ही होने चाहिए।
खासकर ऐसे मामलों में जहां दायरा राज्य से बाहर भी जाता हो। हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने से पहले न तो मजदूर संगठनों से बात की और न ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय या फिर साथी पड़ोसी राज्यों से।
उद्योगों को भी साथ लेकर चलने की जरूरत है और मजदूरों का ध्यान रखने की भी। मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए लेकिन उद्योगों की भी सुरक्षा होनी चाहिए।
पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जिस तरह आग फैली है उसमें राजनीतिक मंशा देखी जा रही है क्योंकि अगले साल की शुरूआत में ही वहां चुनाव है। राजस्थान में भी न्यूनतम वेतन अपेक्षाकृत कम है लेकिन वहां भिवाड़ी के अलावा किसी स्थान पर कोई घटना नहीं हुई और अब शांत है।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने क्या कहा?
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश इस मामले को खुद संभाल सकता है। लेकिन जरूरत हुई तो राज्यों के साथ चर्चा भी होगी और मदद भी की जाएगी।