कश्मीर और पॉलिटिकल कॉम्प्रोमाइज: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
Kashmir and Political Compromise
Kashmir and Political Compromise: अजीत डोभाल जी ने एक इंटरव्यू में प्रश्न उठाया था कि जब 535 प्रिंसली स्टेट्स भारत में विलय कर एक राष्ट्र बना सकती थीं, तो कश्मीर भी एक प्रिंसली स्टेट था और उसका विलय भी सहज रूप से हो सकता था, लेकिन कबायली हमले के मुद्दे को लेकर मामला यूएन में ले जाया गया और पूरे विषय को इंटरनेशनलाइज कर दिया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि आज भी ‘पीओके’ अस्तित्व में है। ‘पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर’ चाचा कॉम्प्रोमाइज के पाकिस्तान प्रेम का परिणाम है।
जब संसद में एयर इंडिया की ओर से यह आपत्ति उठाई गई थी कि उसके करियर का इस्तेमाल इस तरह किया जा रहा है कि ‘इंडिया इज ए स्नेक चार्मर्स कंट्री’ यानी सपेरों का देश बताकर प्रचारित किया जा रहा था, तो नेहरू ने सदन में कहा कि यह तो अच्छी बात है, विदेशी इसी बात से आकर्षित होते हैं, इसलिए इसे बदलने की जरूरत नहीं है, हम सपेरों का ही देश हैं। यह भी एक स्तर का कॉम्प्रोमाइज था, क्योंकि नेहरू स्वयं को अंतिम अंग्रेज समझते थे, जो भारत की सत्ता पर काबिज है। उन्होंने स्वयं को भारतीय दृष्टि से नहीं देखा, बल्कि एक अंग्रेज की तरह आचरण किया, और यही नजरिया आगे भी गांधी परिवार की राजनीति में दिखाई देता है।